मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार, 8 जून को सोना और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 3,470 रुपये टूटकर 10 ग्राम के लिए 1.51 लाख रुपये पर आ गई, जबकि चांदी 15,748 रुपये सस्ती होकर 2.41 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
सिर्फ 8 दिनों में चांदी ₹22 हजार लुढ़की
31 मई को चांदी की कीमत 2,63,350 रुपये प्रति किलो थी, जो अब घटकर 2.41 लाख रुपये रह गई है। यानी महज आठ दिनों में चांदी में करीब 22 हजार रुपये की गिरावट आ चुकी है।
ऑलटाइम हाई से ₹1.45 लाख नीचे आई चांदी
31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव 2.30 लाख रुपये प्रति किलो था। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को यह रिकॉर्ड 3.86 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। लेकिन अब 130 दिनों के भीतर चांदी अपने उच्चतम स्तर से करीब 1.45 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है। वहीं, सोना भी 29 जनवरी 2026 के अपने रिकॉर्ड स्तर 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से करीब 25 हजार रुपये नीचे आ गया है।
आखिर क्यों टूट रहे हैं सोना-चांदी के भाव?
निवेशक कैश को दे रहे प्राथमिकता
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक जोखिम कम करना चाहते हैं। ऐसे में कई बड़े निवेशक सोना-चांदी बेचकर नकदी (कैश) इकट्ठा कर रहे हैं।
रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली
जनवरी में सोना और चांदी दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। इसके बाद बड़े निवेशकों ने ऊंचे दाम पर अपनी होल्डिंग बेचनी शुरू कर दी, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना।
निवेशकों की बढ़ी चिंता
आमतौर पर युद्ध और वैश्विक संकट के दौरान सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश माना जाता है और इनके दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार निवेशकों का रुझान लिक्विडिटी यानी नकदी बनाए रखने की ओर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि जियो-पॉलिटिकल तनाव के बावजूद कीमती धातुओं में दबाव देखने को मिल रहा है।