मुम्बई. भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 11.47 अरब डॉलर की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह 740.80 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इससे ठीक पिछले सप्ताह भी भंडार में 12.42 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी और यह 729.39 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इस तरह लगातार 2 सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 23.89 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। इससे पहले 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भंडार 728.49 अरब डॉलर के तत्कालीन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच भंडार पर दबाव देखा गया था।
रुपये पर दबाव के बीच आरबीआई का हस्तक्षेप
पश्चिम एशिया में संघर्ष और उससे जुड़े आर्थिक तनाव के दौरान भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा था। विदेशी पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता के बीच रुपये को स्थिर रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा था। केंद्रीय बैंक ने जरूरत के अनुसार डॉलर की बिक्री कर बाजार में तरलता और विनिमय दर के दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश की। ऐसे दौर में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आना स्वाभाविक माना जाता है, क्योंकि केंद्रीय बैंक बाजार में डॉलर उपलब्ध कराता है। अब भंडार में लगातार हो रही वृद्धि यह संकेत देती है कि बाहरी क्षेत्र की स्थिति में फिर से मजबूती आई है और विदेशी मुद्रा उपलब्धता का आधार पहले से अधिक मजबूत हुआ है।
रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली पहल से बढ़ा प्रवाह
विदेशी मुद्रा भंडार में हालिया वृद्धि के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक की जून में घोषित रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय मुद्रा पर तेज दबाव के बीच शुरू की गई इस पहल के बाद देश में विदेशी मुद्रा का बड़ा प्रवाह आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस पहल से 132 अरब डॉलर से अधिक का नया प्रवाह आया है। इससे बैंकिंग व्यवस्था में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ केंद्रीय बैंक के भंडार को मजबूत करने में मदद मिली है। विदेशी मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में आवश्यक डॉलर उपलब्धता सुनिश्चित करना और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता को सीमित करना भी रहा है। लगातार बढ़ता भंडार इस पहल के प्रभाव को रेखांकित करता है।
विदेशी मुद्रा आस्तियों में 9.34 अरब डॉलर की वृद्धि
28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा आस्तियां 9.34 अरब डॉलर बढ़कर 600.67 अरब डॉलर हो गईं। विदेशी मुद्रा भंडार में इन आस्तियों की हिस्सेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है और इनमें विभिन्न प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं से जुड़ी परिसंपत्तियां शामिल होती हैं। डॉलर के संदर्भ में इन आस्तियों के मूल्य में बदलाव केवल डॉलर की प्रत्यक्ष स्थिति से निर्धारित नहीं होता, बल्कि यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए विदेशी मुद्रा आस्तियों में वृद्धि को व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार की गतिविधियों के संदर्भ में भी देखा जाता है।
स्वर्ण भंडार ने भी दिया मजबूती का सहारा
समीक्षाधीन सप्ताह में भारत के स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, स्वर्ण भंडार 2.19 अरब डॉलर बढ़कर 116.41 अरब डॉलर हो गया। वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में सोने को सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में देखा जाता है। केंद्रीय बैंक भी अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी को महत्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि इससे भंडार में विविधता आती है और बाहरी जोखिमों से निपटने की क्षमता मजबूत होती है। विदेशी मुद्रा आस्तियों के साथ स्वर्ण भंडार में हुई यह वृद्धि कुल भंडार को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण रही। इससे भारत के कुल आधिकारिक भंडार में परिसंपत्तियों का संतुलन भी मजबूत हुआ है।
एसडीआर और आईएमएफ में भारत की स्थिति में मामूली गिरावट
विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य घटकों में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान मामूली कमी दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, विशेष आहरण अधिकार यानी SDR में 4.3 करोड़ डॉलर की कमी आई और यह 18.81 अरब डॉलर रह गया। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के पास भारत के आरक्षित कोष की स्थिति भी 1.1 करोड़ डॉलर घटकर 4.91 अरब डॉलर रह गई। हालांकि इन दोनों घटकों में हुई कमी की तुलना विदेशी मुद्रा आस्तियों और स्वर्ण भंडार में हुई वृद्धि से काफी कम है। यही कारण है कि समग्र विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड वृद्धि का रुझान प्रभावित नहीं हुआ। 740.80 अरब डॉलर का स्तर भारत के बाहरी वित्तीय सुरक्षा कवच की मजबूती को दर्शाता है और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में यह स्थिति देश के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।