भोपाल, नाबालिग बच्चों को शारीरिक, भावनात्मक या यौन शोषण से बचाने के उद्देश्य से बनाए गए 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम-2012' यानि पॉक्सो के मध्यप्रदेश में कई केस सामने आए हैं। 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को सुरक्षित माहौल न मिलना चिंता का विषय है। ऐसे में मध्य प्रदेश में पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मामलों पर जबलुपर हाई कोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए स्वत: संज्ञान लिया है।
लोगों में जागरूकता का अभाव
एमपी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा है कि अधिकांश प्रकरणों में पीड़िता की आयु 16 से 18 वर्ष के बीच है, जबकि आरोपियों की आयु 19 से 22 वर्ष के बीच पाई गई है। न्यायाधीशों ने इसके पीछे मुख्य कारण पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के बारे में पर्याप्त जागरूकता का अभाव बताया है।
14531 मामले हैं लंबित
फिलहाल हाई कोर्ट की तीनों पीठों में कुल करीब 14,531 आपराधिक मामले लंबित हैं। मुख्य न्यायाधीश ने पुलिस अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों को इस अधिनियम के प्रावधानों के बारे में समय-समय पर प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए हैं।
पॉक्सो अधिनियम को लेकर जरूरी जानकारी
भारत सरकार द्वारा अधिनियमित यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 बच्चों को शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है। पॉक्सो अधिनियम 2012 में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान है।
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