राज्य बजट को लेकर हर वर्ग उत्साहित है। युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार का प्रशिक्षण चाहिए तो पेंशनर व नौकरी पेशा अपनी लंबित समस्याओं का समाधान चाहते हैं। आधी आबादी को लगता है कि महिला सशक्तीकरण के नारे तो सरकार बुलंद कर रही है लेकिन विसंगतियों के चलते विभिन्न योजनाओं का न लाभ मिल पा रहा है और न ही हिंसा व उत्पीडऩ दूर हो सका। किसान तकनीक के साथ कदमताल जरूरी समझने लगे हैं, उनका जैविक खेती की तरफ रुझान है, बशर्ते सरकारी स्तर पर उन्हें और प्रोत्साहन मिले।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य के मुकाबले शिक्षा व रोजगार प्रदेशवासियों के लिए सबसे जरूरी हैं। इसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से कानून व्यवस्था का नंबर आता है। राज्य बजट को लेकर पत्रिका की ओर से प्रदेश में करवाए गए सर्वे में सर्वाधिक 41.5 फीसदी लोगों की राय है कि बजट में शिक्षा व रोजगार सेक्टर को ध्यान में रखें।
शैक्षणिक गुणवत्ता संग रोजगार के अवसर बढ़ाने की कार्ययोजना बनाने की जरूरत है। इसके अलावा 15.5 फीसदी लोगों ने कृषि एवं किसान कल्याण की ओर ध्यान देने की जरूरत बताई। बजट सर्वे में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र जनों ने रुचि दिखाई। कृषि और किसान कल्याण, महिला एवं बाल विकास, युवा और खेल और सड़क ट्रांसपोर्ट को लेकर भी प्रदेशवासियों ने राय रखी।
मध्यप्रदेश के 15 प्रतिशत कृषि और किसान कल्याण, 7 प्रतिशत स्वास्थ्य और 3.5 प्रतिशत की प्राधमिकता इन्फ्रास्ट्रक्चर
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