मध्य प्रदेश के नए मुखिया का नाम लंबी कश्मकश के बाद तय कर दिया गया है. मोहन यादव को विधायक दल ने अपना नेता चुनते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद पर सुशोभित कर दिया है. निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी लोगों में शामिल रहे डॉ. मोहन यादव अब प्रदेश के नए मुखिया तो हो गए हैं. लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान उनके अपने घर से दूर रहकर अदा करनी पड़ सकती है. बाबा महाकाल की नगरी से जुड़ी एक किंवदंती के चलते ये एहतियात उन्हें भी बरतनी पड़ेगी.
एक साथ दो राजा नहीं रूक सकते
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में यह मान्यता बहुत लंबे समय से चली आ रही है, कि जो भी राजनेता बाबा महाकाल के दरबार में रात गुजारते हैं, उनकी सत्ता में वापसी नहीं हो पाती. दरअसल बाबा महाकाल को उज्जैन का राजाधिराज माना जाता है. इसलिए ऐसी मान्यता है कि बाबा महाकाल के दरबार में एक साथ दो राजा नहीं रूक सकते हैं. अगर कोई मंत्री या मुख्यमंत्री गलती से भी यहां रात गुजारता है तो उसकी सत्ता में वापसी की राह मुश्किल हो जाती है.
बहुत पुरानी है यह परंपरा
दरअसल, यह कोई नई परंपरा नहीं है.अवंतिका नगरी में राजा विक्रमादित्य की यह राजधानी थी. राजा भोज के समय से ही उज्जैन में कोई रात में नहीं रुकता था. इस मंदिर का निर्माण 1736 में हुआ है. परंपरा का पालन लोग उसी समय से करते आ रहे हैं.
राज गद्दी में विराजित होते थे महाकाल
जब राजा विक्रम भी यहां के राजा थे तब उनका किला भी इस परिधि मे ही था. लेकिन जब भी विक्रम न्याय करने जाते थे तब राजा की कुर्सी पर भगवान महाकाल विराजित होते थे इसलिए वह न्याय कर पाते थे. उन्होंने यहा राज किया इसलिए विक्रम राजा कों इस परिधि मे रहने की अनुमति मिली. इसलिए वो यहां के राजा कहलाते थे. बाकि कोई अन्य राजा रात रुकेंगे तो उन्हें दंड के रूप मे परिणाम भुगतना पड़ता है.
जानिए किसे-किसे भुगतना पड़ा खामियाजा
पंरपरागत चली आ रही मिथक के अनुसार जो भी नेता या मंत्री बाबा महाकाल के दरबार में रात्रि विश्राम करते हैं, उनकी कुर्सी छिन जाती है. ऐसा कहा जाता है कि भारत के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई एक रात उज्जैन में रुके थे और दूसरे दिन ही उनकी सरकार गिर गई थी. वहीं कर्नाटक के मुख्मंत्री येदियुरप्पा भी उज्जैन में रात्रि विश्राम किए थे, जिसके 20 दिन बाद उन्हें अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ा था.
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