ग्वालियर महानगर में एक ऐसा मंदिर है, जहां साल में एक बार छोटी दिवाली या नरक चौदस के दिन यमराज का अभिषेक किया जाता है। यह मंदिर फूल बाग पर स्थित मारकंडेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर का निर्माण सिंधिया जी के शासनकाल में लगभग 250 से 300 वर्ष पूर्व कराया गया था। यह जानकारी मंदिर के छोटे महंत पंडित महेश शर्मा ने दी।
श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था
पंडित महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि आज ही के दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था और उसके यहां से 16000 कन्याओं को मुक्त कराया था। उन्होंने बताया कि मारकण्ये नाम के ऋषि को लेने जब यमराज आए तो उन्होंने शिवलिंग को आलिंगन कर लिया, तब भगवान से प्रकट हुए और यमराज से कहा कि मैं इनको अजर अमर होने का वरदान देता हूं।
क्या है मान्यता?
ऐसी मान्यता है कि आज नरक चौदस के दिन यमराज का अभिषेक करने पर उसे व्यक्ति एवं उसके परिवार को नरक का भय नहीं रहता है। पंडित महेश शर्मा ने बताया कि आज के दिन तेल स्नान करने के बाद तेल का दीपक दक्षिण दिशा में रखना चाहिए।
खास तरीके से होती है यमराज की पूजा
पंडित शर्मा बताते हैं कि नरक चतुर्दशी के दिन यमराज की पूजा-अर्चना भी खास तरीके और नियम से की जाती है। पहले यमराज की प्रतिमा पर कई बार घी ,तेल,पंचामृत, इत्र, फूल-माला, दूध, दही और शहद आदि से अभिषेक होता है। इससे बाद यमराज स्तुति गान और पूजा करने के बाद दीप-दान होता है। खास बात यह है कि यमराज का दीपक भी बेहद खास रहता है। यमराज की आरती चांदी के चौमुखी दीपक से उतारी जाती हे। यमराज की पूजा के लिए भक्तों की भीड़ जुटती है।
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