रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर सामने आए एक गंभीर मामले ने शासन–प्रशासन से लेकर किसानों तक को चौंका दिया है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये के धान की अनियमित हेराफेरी की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई करते हुए उपलेटा राइस मिल को सील कर दिया है। इस पूरी कार्रवाई की निगरानी स्वयं कलेक्टर कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने मौके पर पहुंचकर की। अधिकारियों ने दो टूक कहा कि किसानों की मेहनत और सरकारी संसाधनों से जुड़े इस प्रकरण में किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की जांच के लिए एसडीएम अजय शतरंज, तहसीलदार कुणाल पांडे सहित राजस्व विभाग की टीम को तैनात किया गया है।
AI रिपोर्ट में मुंगेली बना रेड ज़ोन
कलेक्टर कुंदन कुमार के अनुसार, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और खाद्य सचिव के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद यह तथ्य सामने आया कि AI आधारित एनालिटिक्स रिपोर्ट में मुंगेली जिले को धान खरीदी घोटाले के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र बताया गया है। रिपोर्ट में जिले से जुड़े 370 हाई-रिस्क अलर्ट दर्ज किए गए, जिनमें— डिलीवरी ऑर्डर में असामान्य गतिविधियां, वाहनों की वहन क्षमता से कई गुना अधिक परिवहन, ट्रांसपोर्ट के दौरान GPS डेटा में गड़बड़ी, जैसे तथ्य सामने आए हैं।
अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक मिल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे खरीदी और मिलिंग तंत्र की परत-दर-परत जांच की शुरुआत है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, AI मॉनिटरिंग सिस्टम ने पूरे प्रदेश में 786 संदिग्ध अलर्ट चिह्नित किए, जिनमें सबसे अधिक केस मुंगेली जिले से जुड़े पाए गए। जांच के दौरान कुछ ऐसे वाहन सामने आए, जिनके रिकॉर्ड में वास्तविक क्षमता से 2000 प्रतिशत तक अधिक धान परिवहन दर्शाया गया था, जिसे तकनीकी रप से असंभव माना जा रहा है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर उपलेटा राइस मिल और नवागांव घुटेरा धान खरीदी केंद्र को विशेष जांच के दायरे में लिया गया है। जांच टीम को ऐसे इनपुट भी मिले हैं, जिनसे खरीदी केंद्रों और मिल संचालकों के बीच सांठगांठ की आशंका गहराती जा रही है।
प्राथमिक जांच में— एक ही गेट पास का बार-बार उपयोग, ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग में छेड़छाड़, मिलिंग और स्टॉक रजिस्टर में विसंगतियां पाई गई हैं।
आशंका जताई जा रही है कि समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान अवैध रूप से बाजार में बेचा गया, जिससे किसानों को मिलने वाला लाभ बिचौलियों तक सिमट गया। प्रशासनिक टीम ने छापेमारी और जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सामग्री जब्त की है—कुल 9 ट्रक धान जब्त, जिनमें से 3 वाहन AI रिपोर्ट में पहले से संदिग्ध थे, मिलिंग रिकॉर्ड और बैंक गारंटी से जुड़े कागजात कब्जे में, GPS डेटा और ट्रांसपोर्ट लॉग की तकनीकी जांच जारी, एफसीआई को चावल जमा न किए जाने के मामलों की भी पड़ताल आगे भी जारी रहेगी, वहीं खाद्य विभाग ने मौके पर भौतिक स्टॉक सत्यापन किया है।
संदिग्ध वाहनों को थाने में खड़ा कराया गया है और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही जिले की अन्य राइस मिलों और खरीदी केंद्रों की भी गहन स्क्रीनिंग प्रारंभ कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले से हुए संभावित नुकसान का आकलन कर किसानों के हितों की हरसंभव सुरक्षा की जाएगी। भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए सभी धान खरीदी केंद्रों पर AI आधारित रियल-टाइम निगरानी प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया है।
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