बलरामपुर, छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के हंसपुर गांव में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि अवैध बॉक्साइट खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर एसडीएम और उनके साथियों ने लाठीचार्ज किया, जिसमें एक ग्रामीण की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के बाद पुलिस ने करुण डहरिया और उनके साथ मौजूद लोगों को हिरासत में ले लिया है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और पूरे इलाके में तनाव का माहौल है।
क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों का आरोप है कि हंसपुर गांव में अवैध बॉक्साइट खनन हो रहा था। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। बताया जा रहा है कि बहस के दौरान मामला हिंसक हो गया और तीन ग्रामीणों की पिटाई की गई।
इस घटना में:
एक ग्रामीण की मौत
दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल
गांव में भारी आक्रोश
ग्रामीणों का दावा है कि घटना आधी रात के आसपास हुई और एसडीएम निजी वाहन (थार) से मौके पर पहुंचे थे। साथ मौजूद लोगों की पहचान और उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पहले भी विवादों में रहे हैं करुण डहरिया
करुण डहरिया 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और पूर्व में भी विवादों में रह चुके हैं।
मुख्य आरोप और विवाद:
एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने का मामला
गरियाबंद में जनपद CEO रहते बोरवेल खनन का बिल पास कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
पामगढ़ में SDM रहते छात्रों से ज्ञापन लेने से इनकार
छात्रों द्वारा थप्पड़ मारने की धमकी देने का आरोप
हालांकि इन मामलों में आधिकारिक स्थिति और अंतिम निष्कर्ष क्या रहे, इस पर प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
आदिवासी समाज का अल्टीमेटम
घटना के बाद सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत सिंह ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सियासत भी गरमाई
मामला सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अधिकारी ही जान लेने लगें तो ग्रामीण न्याय के लिए कहां जाएंगे। वहीं सांसद संतोष पांडेय ने कांग्रेस शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। घटना के बाद क्षेत्र में चक्काजाम और विरोध प्रदर्शन हुए। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
उठ रहे बड़े सवाल
क्या एसडीएम कानून समझाने गए थे या खुद कानून हाथ में ले लिया?
आधी रात को प्रशासनिक अधिकारी निजी वाहन से क्यों पहुंचे?
उनके साथ मौजूद लोग कौन थे?
क्या वाकई अवैध खनन और वसूली को लेकर विवाद हुआ था?
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक मर्यादा पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है।
आगे क्या?
फिलहाल जांच जारी है। प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। अब देखना होगा कि कार्रवाई मिसाल बनेगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। हंसपुर की घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है—जब सेवक शासक बन जाए, तो जनता न्याय के लिए किस दरवाजे पर दस्तक दे?
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