छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की तय समयसीमा 31 मार्च 2026 है और इस दिशा में कार्रवाई तेज हो चुकी है। मंगलवार को सुकमा जिला में 22 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वालों ने राज्य सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति और ‘पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से प्रेरित होकर यह कदम उठाया। उन्होंने अपने हथियार पुलिस को सौंप दिए और सरकार के साथ मिलकर आगे बढ़ने की इच्छा जताई। डेडलाइन से पहले सुकमा में हुआ यह सामूहिक सरेंडर बेहद अहम माना जा रहा है।
सुकमा में 22 नक्सलियों ने किया सरेंडर
सुकमा जिले के एसपी ने बताया कि प्रदेश में नक्सली संगठन लगातार कमजोर हो रहे हैं। आज 22 नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा को अपनाया है। शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी को आवश्यक सुविधाएं और सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले में लगातार नक्सल विरोधी अभियान चल रहे हैं। साथ ही बड़ी संख्या में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं और गांवों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है, जिससे विकास कार्यों के प्रति स्थानीय लोगों का भरोसा बढ़ा है।
पुनर्वास नीति का मिलेगा फायदा
माओवादी संगठन अब सीमित क्षेत्रों में सिमट गया है और सुरक्षा बलों का लक्ष्य जल्द ही इसे पूरी तरह समाप्त करना है। नक्सली विचारधारा छोड़कर अब कई माओवादी पुनर्वास नीति पर भरोसा जता रहे हैं, जिससे सुकमा में संगठन की पकड़ कमजोर होती दिख रही है।
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