मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों का मुद्दा जोर-शोर से उठा। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सरकार से इस गंभीर समस्या पर जवाब मांगा।
19 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले
विधायक ने बताया कि वर्ष 2025 में 19 हजार से ज्यादा डॉग बाइट के प्रकरण दर्ज किए गए। भोपाल में कुत्तों की नसबंदी पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या कम नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि शहर की स्थिति चिंताजनक और विस्फोटक होती जा रही है।
सीएम का जवाब
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आवारा श्वान सदियों से समाज का हिस्सा रहे हैं। बदलते मौसम और कुपोषण के कारण उनके व्यवहार में आक्रामकता बढ़ी है। नगर निगम की टीमें लगातार काम कर रही हैं और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम लागू हैं। नसबंदी के बाद श्वानों को उसी क्षेत्र में छोड़ा जाता है और एंटी-रेबीज टीकाकरण भी कराया जा रहा है।
मंत्रियों और विधायकों की प्रतिक्रियाएं
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नसबंदी के लिए प्रदेश में डॉक्टरों की कमी है, जिसे दूर करने के लिए अन्य राज्यों से विशेषज्ञ बुलाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि कुछ निर्णय ‘डॉग लवर्स’ के कारण अटके हुए हैं।
वहीं राजन मंडलोई ने वैक्सीन की गुणवत्ता और डॉग बाइट से हुई मौतों पर मुआवजे का सवाल उठाया।
गोपाल भार्गव ने सख्त कदम उठाने की मांग की, जबकि स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि एंटी-रेबीज टीके की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है।
अंत में विजयवर्गीय ने कहा कि सभी सुझावों पर विचार किया जाएगा और विस्तृत मंथन के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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