छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में शून्यकाल के दौरान राम मंदिर चंदा मामले को लेकर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे को सदन में उठाते हुए चर्चा की मांग की, जिसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
अजय चंद्राकर बोले- यह विधानसभा का विषय नहीं
स्थगन प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष की ओर से विधायक अजय चंद्राकर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह विषय छत्तीसगढ़ विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें चर्चा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चर्चा सदन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।
विपक्ष ने लगाया चर्चा से रोकने का आरोप
सत्ता पक्ष की आपत्ति पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि जब सरकार किसी विषय को सदन में लाती है तो उस पर चर्चा होती है, लेकिन विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर लगातार व्यवधान खड़ा किया जाता है। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई।
भूपेश बघेल ने लगाए गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शून्यकाल में कहा कि अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन के दौरान गांव-गांव से करोड़ों रुपये का चंदा एकत्र किया गया था, लेकिन उस राशि का अब तक सार्वजनिक हिसाब नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग शामिल हैं।
'मैंने भी राम मंदिर के लिए चंदा दिया था'
भूपेश बघेल ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था। उन्होंने कहा कि भगवान राम को छत्तीसगढ़ का भांजा माना जाता है और इसी भावना के तहत उनकी सरकार ने राम वन गमन पथ परियोजना विकसित की थी।
'पहले वोट की चोरी, अब चढ़ावे की चोरी'
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि "पहले वोट की चोरी हुई और अब चढ़ावे की चोरी"। उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल और गर्म हो गया तथा पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।