रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर 182.98 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त भुगतान के मामले में जांच एजेंसी ने CSMCL के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ विशेष न्यायालय में पूरक चालान पेश किया है।
कर्मचारियों के नाम पर निकाली गई करोड़ों की रकम
जांच के अनुसार, वर्ष 2019 की निविदा में कर्मचारियों के नियमित वेतन के अलावा ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम का भुगतान करने का प्रावधान था। इसके तहत मैनपावर एजेंसियों को पहले कर्मचारियों को राशि का भुगतान करना था और बाद में CSMCL से इसकी प्रतिपूर्ति लेनी थी।
वेतन के नाम पर गड़बड़ी का खुलासा
EOW और ACB की जांच में सामने आया कि कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त दिनों के काम की राशि या तो दी ही नहीं गई या फिर वास्तविक भुगतान से अधिक रकम दर्शाकर देयक प्रस्तुत किए गए। कर्मचारियों ने अपने बयानों में बताया कि उन्हें केवल सामान्य वेतन मिला, जबकि उनके नाम पर अतिरिक्त भुगतान के रूप में बड़ी रकम निकाली गई।
आंगड़िया नेटवर्क के जरिए रकम पहुंचाने के साक्ष्य
पूरक चालान में अवैध रूप से वसूली गई नकद रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए आंगड़िया नेटवर्क के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है। महमूद अहमद खान और अन्य गवाहों के बयानों के आधार पर जांच एजेंसी को रकम मुंबई और हैदराबाद तक पहुंचाए जाने के साक्ष्य मिले हैं।
पहले 12 आरोपियों के खिलाफ पेश हो चुका है चालान
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के प्रतिवेदन के आधार पर 12 आरोपियों के खिलाफ 18 मई 2026 को पहले ही चालान पेश किया जा चुका है। अब अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान पेश किए जाने के बाद शराब घोटाले से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और भुगतान में अनियमितताओं की जांच में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ गई है।