मिर्जापुर | आईएएस पद से इस्तीफा दे चुकीं दिव्या मित्तल ने अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने का ऐलान किया है। दी गई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अपनी पार्टी का नाम जनता शक्ति पार्टी रखा है और मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की है। उनके इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर उन्होंने मिर्जापुर को ही अपनी राजनीतिक शुरुआत के लिए क्यों चुना।
फूलन देवी से अनुप्रिया पटेल तक, मिर्जापुर की अलग राजनीतिक पहचान
विंध्य पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा मिर्जापुर धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है। मां विंध्यवासिनी धाम के कारण यह क्षेत्र देशभर में प्रसिद्ध है और इसे विंध्यधाम के नाम से भी जाना जाता है। मिर्जापुर ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी, पूर्व सांसद फूलन देवी, बालकुमार पटेल और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल जैसे नेताओं को राष्ट्रीय राजनीति में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। यही वजह है कि जिले की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहती है।
मिर्जापुर में हैं पांच विधानसभा सीटें
मिर्जापुर जिले में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें मिर्जापुर नगर, मझवां, चुनार, मड़िहान और छानबे शामिल हैं। छानबे विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इन सीटों पर स्थानीय मुद्दे, जातीय और सामाजिक समीकरण, विकास कार्य तथा उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाले अहम कारक हो सकते हैं।
सदर सीट चुनने के पीछे क्या हो सकती है रणनीति?
दिव्या मित्तल के मिर्जापुर सदर सीट से चुनाव लड़ने के फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, किसी भी उम्मीदवार के लिए विधानसभा क्षेत्र चुनते समय स्थानीय संपर्क, मतदाताओं के बीच पहचान, संगठन की मजबूती और क्षेत्रीय मुद्दों जैसे पहलुओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जनता शक्ति पार्टी के गठन और चुनाव लड़ने की तैयारी के साथ दिव्या मित्तल के सामने अब अपने राजनीतिक संगठन को मजबूत करने और स्थानीय मतदाताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती होगी। उनके चुनावी अभियान, पार्टी की नीतियों और क्षेत्र में समर्थन के आधार पर आगे की राजनीतिक तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।