भोपाल | मध्य प्रदेश में मानव और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक रसायन पैराक्वेट डाइक्लोराइड के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य शासन ने निर्माता कंपनियों के पास बचे स्टॉक को तत्काल नष्ट करने के निर्देश भी दिए हैं। यह रसायन फसलों के हरे हिस्सों को तेजी से सुखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी अत्यधिक विषाक्तता के कारण यह जानलेवा साबित हो सकता है।
क्या है पैराक्वेट डाइक्लोराइड?
पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक शक्तिशाली खरपतवारनाशक रसायन है, जिसे ग्रामोक्सोन (Gramoxone) जैसे ट्रेड नामों से भी जाना जाता है। पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आते ही यह उन्हें तेजी से नुकसान पहुंचाकर सुखा देता है। हालांकि, यह रसायन इंसानों और जानवरों के लिए भी अत्यंत विषैला है। इसके संपर्क में आने या शरीर में पहुंचने से फेफड़ों और गुर्दों को गंभीर नुकसान हो सकता है। पैराक्वेट विषाक्तता के लिए कोई विशिष्ट एंटीडोट उपलब्ध नहीं है।
मूंग की फसल में क्यों किया जाता था इस्तेमाल?
मूंग की कटाई से पहले कुछ किसान पत्तियों को सुखाने और फसल की कटाई आसान बनाने के लिए पैराक्वेट डाइक्लोराइड का इस्तेमाल करते रहे हैं। इसके छिड़काव के बाद पौधों के हरे हिस्से तेजी से सूखने लगते हैं, जिससे कटाई और थ्रेसिंग में सुविधा होती है। इससे समय और मजदूरी की लागत कम करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, दी गई जानकारी के अनुसार, मूंग की फसल पर इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद कथित तौर पर कुछ किसान इसका अवैध इस्तेमाल करते रहे हैं। राज्य में इस रसायन पर प्रतिबंध और बचे हुए स्टॉक को नष्ट करने के निर्देश इसी खतरे के मद्देनजर महत्वपूर्ण हैं।
स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है यह रसायन?
पैराक्वेट डाइक्लोराइड के शरीर में पहुंचने पर गंभीर विषाक्तता हो सकती है। इससे फेफड़ों, किडनी और अन्य अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है। रसायन के अवशेषों वाली फसल के सेवन से जुड़े जोखिम को लेकर भी सावधानी जरूरी है। हालांकि, किसी विशेष बीमारी या कैंसर का खतरा केवल संभावित संपर्क के आधार पर निश्चित नहीं माना जा सकता; जोखिम की गंभीरता संपर्क की मात्रा और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
किसानों और आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
पैराक्वेट डाइक्लोराइड जैसे अत्यधिक विषैले रसायनों का इस्तेमाल केवल लागू नियमों और अधिकृत निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। प्रतिबंधित रसायन का उपयोग, भंडारण या निपटान मनमाने तरीके से नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर यह रसायन गिर जाए या इसके निगलने की आशंका हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। उल्टी कराने या घरेलू उपचार करने की कोशिश न करें।