केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले पन्ना जिले के धोड़न गांव में गुरुवार को प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। लंबे समय से चल रहे विरोध और संवाद के बाद भी समाधान नहीं निकलने पर प्रशासन ने पुलिस बल के साथ क्षेत्र खाली करवाने की कार्रवाई शुरू की। ग्रामीणों ने आंसू गैस छोड़ने और बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं, जबकि घटना के बाद पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
महिलाओं और बच्चों के प्रभावित होने का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई और कई महिलाएं जमीन पर गिर पड़ीं। गांव में लंबे समय तक तनाव की स्थिति बनी रही। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना के नाम पर उन्हें पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास दिए बिना हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमित भटनागर ने उठाए सवाल, प्रशासन पर लगाए आरोप
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि भूमि अधिग्रहण की वैध प्रक्रिया के तहत की गई कार्रवाई का प्रमाण प्रशासन प्रस्तुत कर दे, तो वह स्वयं ग्रामीणों से शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत कर समाधान निकालने को तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उचित पुनर्वास और पूर्ण मुआवजे के ग्रामीणों को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, मृतक के परिवार को न्याय और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग की है। फिलहाल धोड़न गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।