एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो.(डॉ.) अजय सिंह ने सोमवार 5 अगस्त को एक पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों, सामने आने वाली चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। प्रो. सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान टीचिंग और ट्रेनिंग, पेशेंट केयर, प्रशासनिक पहल, आउटरीच और सामुदायिक कार्यक्रम तथा महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदमों के बारे में बताया।
बीएससी नर्सिंग की सीटों की संख्या 75 से बढ़कर 2024-25 में 90
प्रो. सिंह ने बताया कि टीचिंग के क्षेत्र में जहां 2022 में बीएससी नर्सिंग की सीटों की संख्या 75 से बढ़कर 2024-25 में 90 हो गईं। वहीं पीजी कोर्स में एमडी/एमएस की सीटे 103 से बढ़कर 165, डीएम/एमसीएच की सीटें 30 से 75 तथा पीजी नर्सिंग की सीट 28 से बढकर 42 हो गईं।
प्रो. सिंह ने बताया कि पिछले 2 साल में 3 नए विभाग मेडिकल जेनेटिक्स, रुमेटोलॉजी और क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन स्थापित किए गए और 4 नए सेंटर, हैप्पीनेस सेंटर, सेंटर ऑफ प्रिसिशन, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन रेयर डिसीज़, सेंटर ऑफ हेमोग्लोबिनोपैथीज़ खोले गए। 13 नए पीजी से संबंधित सुपर-स्पेशलिस्ट कोर्स तथा 34 नई फेलोशिप शुरू की गई। प्रो. सिंह ने बताया कि यूजी-रिसर्च के लिए नई पहल शुरू की गई जो अपने आप में ऐसी प्रथम पहल है। 18 यूजी स्टूडेंटों ने अलग-अलग नेशनल कांफेंस में भाग लिया तथा 15 यूजी स्टूडेंट्स विदेश में रिसर्च के लिए चयनित हुए।
लाईब्रेरी में स्टूडेंट्स के बैठने की क्षमता 250 से बढ़कर 600
सेंन्ट्रल लाईब्रेरी में पुस्तकों की हार्डकॉपी और ई-बुक जैसी सुविधा उपलब्ध है जिसमें 800 नए ई-जर्नल जोड़े गए। इन किताबों में हिन्दी एवं अंग्रेजी में मेडिकल और नॉन मेडिकल किताबें शामिल हैं। प्रो. सिंह ने बताया कि 2022 में लाईब्रेरी पर 65 लाख सालाना खर्च होता था जो बढ़कर 3.5 करोड़ हो गया। हिंदी की किताबें जो मात्र 1200 हुआ करती थीं अब 11670 हो गई हैं। लाईब्रेरी में स्टूडेंट्स के बैठने की क्षमता 250 से बढ़कर 600 हो गई है। एम्स भोपाल 50 अन्य ऐसे मेडिकल कॉलेज जहां शिक्षकों की कमी है वहां विद्यार्थियों के लिए डिजीटल लेक्चर भी उपलब्ध करवा रहा है। एम्स भोपाल में संचालित स्टूडेंट्स वेलनेस सेंटर में एक साल में 714 स्टूडेंट्स ने कंसल्ट किया।
आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या में भी 250 प्रतिशत का उछाल
प्रो. सिंह ने बताया कि बेबसाइट और एप से पहले 42000 रजिस्ट्रेशन होते थे जो 2023-24 में 1 लाख हो गए । आभा लिंकेज़ केवल एक साल में एक लाख 80 हजार हुए। अगर ओपीडी में मरीजों की संख्या की बात करें तो ये पिछले दो सालों में 3 लाख 76 हजार से बढकर 10 लाख 50 हजार हो गया है। मेज़र सर्जरी में 92 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जबकि माइनर सर्जरी 300 प्रतिशत बढ़ गई हैं। ट्रॉमा और इमरजेंसी में हमारी नो रिफ्यूजल पॉलिसी के कारण मरीजों में 110 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई जबकि भर्ती होने वाले मरीज 180 प्रतिशत बढ़ गए। आयुषमान योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या में भी 250 प्रतिशत का उछाल आया है। जल्द ही हम ह्दय और फेंफड़े का ट्रांसप्लांट भी शुरू करेंगे। इसके अलावा वन स्टेट वन हेल्थ की दिशा में एम्स भोपाल ने एसओपी तैयार की है जिसके तहत पूरे प्रदेश में एम्स के स्तर का इलाज मिल सके ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं। आने वाले दिनों में 60 करोड़ की लागत के दो रोबेाट भी खरीदे जा रहे हैं जिससे जटिल ऑपरेशन करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा एम्स भोपाल रोगी कल्याण हेतु अन्य कई सारे कार्यक्रम चला रहा है, जिसमें यह प्रयास रहता है कि कोई भी व्यक्ति बिना इलाज के यहां से न जाए।
Written By-Utsav Gupta
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