भोपाल. मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 54 बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। इस मामले में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत कर स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया है। यह घटनाक्रम न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि भारत विश्व में बाघों का सबसे बड़ा आवास क्षेत्र माना जाता है।
रिजर्व के बाहर भी बढ़ेगा सुरक्षा घेरा
नई रणनीति के तहत अब केवल टाइगर रिजर्व तक ही सुरक्षा सीमित नहीं रहेगी। ‘टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व’ योजना के अंतर्गत रिजर्व से सटे जंगलों, वन गलियारों और क्षेत्रीय वन मंडलों में भी वही सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी, जो रिजर्व के भीतर होती है। इस योजना के पहले चरण में मध्य प्रदेश के आठ वन मंडलों को शामिल किया गया है, जिससे बाघों के प्राकृतिक आवागमन क्षेत्रों को भी सुरक्षित किया जा सके।
हाईटेक निगरानी से शिकारी पर शिकंजा
बाघों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी को रोकने के लिए अब आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, सुदृढ़ वायरलेस संचार और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही स्ट्राइक फोर्स की तैनाती और आधुनिक हथियारों के उपयोग से अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
कोर क्षेत्र रहेगा पूर्णतः सुरक्षित
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के कोर क्षेत्रों को पूर्णतः अछूता रखना अनिवार्य किया गया है। इसका अर्थ है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप प्रतिबंधित रहेगा, जिससे बाघों को उनके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित जीवन मिल सके। यह कदम बाघों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बढ़ती संख्या के बीच सुरक्षा की चुनौती
भारत में वर्तमान में 3,682 बाघ मौजूद हैं, जो इसे विश्व का सबसे बड़ा बाघ आवास बनाता है। मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या में प्रतिवर्ष लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, लेकिन हाल की मौतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
संरक्षण नीति में बदलाव का व्यापक प्रभाव
नई TOTR योजना केवल एक तात्कालिक उपाय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इससे बाघों के आवास क्षेत्र का विस्तार सुरक्षित होगा और मानव-बाघ संघर्ष को भी कम करने में मदद मिलेगी। यह पहल वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
सतर्कता और तकनीक से सुरक्षित होगा वन्य जीवन
मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर अब तकनीक और व्यापक रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। नई TOTR योजना इस दिशा में एक सशक्त कदम है, जो न केवल बाघों बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।