कोलकाता: पश्चिम बंगाल के लाखों शिक्षकों, प्रोफेसरों और शिक्षाकर्मियों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से लंबित बकाया महंगाई भत्ते (Pending DA) की गणना का काम पूरा कर लिया गया है और इससे संबंधित महत्वपूर्ण फाइल आधिकारिक तौर पर 'नवान्न' (राज्य सचिवालय) भेज दी गई है। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, विकास भवन ने इसी सप्ताह स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त रिपोर्ट वित्त विभाग को सौंपी है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई
राज्य सरकार यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद उठा रही है, जिसमें बकाया डीए के भुगतान को अनिवार्य बताया गया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि डीए का लाभ केवल सरकारी कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि शिक्षकों, पंचायत कर्मियों, नगर पालिका कर्मचारियों और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के कर्मियों को भी मिलेगा।
किसे मिलेगा लाभ और कब से?
विकास भवन द्वारा भेजी गई फाइल में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का डेटा शामिल है। मुख्यमंत्री की पूर्व घोषणा के अनुसार, रोपा-2009 (ROPA-2009) के तहत बकाया डीए का भुगतान मार्च 2026 से चरणबद्ध तरीके से शुरू होने की संभावना है।
चुनावी आचार संहिता का बाधा नहीं
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि चूंकि यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत हो रही है और नीतिगत निर्णय पहले ही लिया जा चुका है, इसलिए वर्तमान चुनावी आदर्श आचार संहिता इस भुगतान प्रक्रिया में कोई कानूनी बाधा नहीं बनेगी। वित्त विभाग की हरी झंडी मिलते ही संबंधित खातों में राशि भेजने की तकनीकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
लंबे समय से आंदोलन कर रहे शिक्षक संगठनों ने इस प्रगति को सकारात्मक माना है, हालांकि वे अब राज्य सरकार के अंतिम आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं।