नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही और अभिनेता संजय दत्त की आगामी फिल्म 'केडी: द डेविल' (KD: The Devil) का गाना 'सरके चुनर तेरी सरके' एक बड़े कानूनी विवाद में फंस गया है। गाने के बोल और इसके फिल्मांकन को 'अश्लील' और 'कुरुचिकर' बताते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार किया है।
क्रिएटिविटी के नाम पर नारी गरिमा से समझौता नहीं: महिला आयोग
सोमवार को हुई एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन ने स्पष्ट रूप से कहा कि रचनात्मकता या क्रिएटिविटी की आड़ में महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए मामला दर्ज किया है। आयोग का मानना है कि गाने के बोल बेहद आपत्तिजनक और सार्वजनिक प्रदर्शन के योग्य नहीं हैं।
नोरा और संजय दत्त को समन
सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्देशक प्रेम, गीतकार रकीब आलम और निर्माण कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद थे, लेकिन मुख्य कलाकार अनुपस्थित रहे। नोरा फतेही की ओर से उनके वकील पेश हुए, जिसे आयोग ने नामंजूर कर दिया। आयोग ने नोरा को 27 अप्रैल तक सदेह (In person) पेश होने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। संजय दत्त को भी आयोग ने 8 अप्रैल को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
यूट्यूब से हटा हिंदी वर्जन
विवाद के बढ़ते ही गाने के हिंदी वर्जन को यूट्यूब से हटा लिया गया है। सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माताओं ने दलील दी कि वे गाने के बोलों का गहरा अर्थ नहीं समझ पाए थे, जिसे आयोग ने सिरे से खारिज कर दिया। अंततः: फिल्म की टीम ने लिखित में माफीनामा जमा किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि गाने का समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। निर्माताओं ने वादा किया है कि अगले तीन महीनों तक वे महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य करेंगे और इसकी रिपोर्ट आयोग को सौंपेंगे।
विवाद की मुख्य वजह
सोशल मीडिया पर गाने के रिलीज होते ही नेटिजन्स ने इसके 'लो-ग्रेड' लिरिक्स और दृश्यों की जमकर आलोचना की थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस के साइबर सेल और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में गाने को प्रतिबंधित करने की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
फिल्म के भविष्य पर संकट के बादल?
कानूनी पचड़े में फंसने के बाद अब सोशल मीडिया पर फिल्म के प्रमोशन और भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 'केडी: द डेভিল' एक बड़े बजट की कन्नड़ फिल्म है, लेकिन इस विवाद ने इसकी छवि को नुकसान पहुँचाया है। अब देखना यह है कि 8 और 27 अप्रैल की सुनवाई के बाद आयोग क्या अंतिम फैसला सुनाता है।