मस्तिष्क में खून का थक्का बनने की स्थिति को ब्रेन क्लॉट कहा जाता है और कई मामलों में यह ब्लीडिंग का कारण भी बन सकती है। यह समस्या अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होती है और शरीर समय रहते उसके संकेत देना शुरू कर देता है। जब दिमाग में थक्का जम जाता है, तो रक्त प्रवाह बाधित होने के कारण ऑक्सीजन और पोषक तत्व ब्रेन तक कम पहुंचते हैं। इससे ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंचने लगता है और स्थिति तेजी से बिगड़ते हुए स्ट्रोक या स्थायी विकलांगता का रूप ले सकती है।
दिमाग में खून का थक्का बनने की प्रक्रिया और उसके प्रभाव
खून का थक्का जमने की प्रक्रिया कई कारणों से शुरू हो सकती है, जैसे अनियमित रक्तचाप, ब्लड वेसल्स का कमजोर होना, चोट या शरीर की क्लॉटिंग सिस्टम में गड़बड़ी। थक्का जमते ही जिस हिस्से की नस ब्लॉक होती है, उस भाग में तुरंत खून का प्रवाह रुक जाता है। यह रुकावट कुछ ही मिनटों में खतरनाक बन जाती है और दिमाग की कोशिकाएँ मरने लगती हैं। ऐसे में मरीज को समय पर चिकित्सा न मिल पाए, तो स्थिति जानलेवा बन सकती है।
न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार शुरुआती संकेत क्यों अहम हैं
न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि ब्रेन क्लॉट बनने से पहले शरीर कई बार हल्के लेकिन बेहद महत्वपूर्ण संकेत देता है। अचानक तीव्र सिरदर्द, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नता, बोलने या देखने में कठिनाई जैसे लक्षण सामान्य नहीं होते, बल्कि मस्तिष्क के उस हिस्से में कामकाज बाधित होने का संकेत होते हैं। यदि इन्हें माइग्रेन, थकान या तनाव समझकर अनदेखा कर दिया जाए, तो इलाज में देरी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। इसलिए विशेषज्ञ समय रहते इन संकेतों को पहचानने की सलाह देते हैं।
अचानक सिरदर्द, कमजोरी और दृष्टि से जुड़े बदलाव को कभी न करें नजरअंदाज
अचानक बहुत तेज और असहनीय सिरदर्द को ब्रेन क्लॉट से जुड़ा सबसे सामान्य और शुरुआती संकेत माना जाता है। यह सामान्य सिरदर्द नहीं होता, बल्कि मरीज इसे जीवन का सबसे दर्दनाक सिरदर्द बताते हैं। इसी तरह शरीर के किसी एक हिस्से में कमजोरी, सुन्नता या झनझनाहट महसूस होना भी इस बात का संकेत है कि दिमाग के मूवमेंट कंट्रोल वाले हिस्से में रक्त प्रवाह बाधित हो रहा है। साथ ही अचानक बोलने में समस्या, शब्दों का सही उच्चारण न कर पाना, भ्रम की स्थिति या धुंधला दिखना भी चेतावनी के गंभीर संकेत माने जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि भाषा और दृष्टि को नियंत्रित करने वाले हिस्सों में खून या ऑक्सीजन की कमी हो रही है।
गोल्डन ऑवर का महत्व और विशेषज्ञों की चेतावनी
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि स्ट्रोक या ब्रेन ब्लीडिंग के मामलों में शुरुआती एक घंटे का समय बेहद अहम होता है। विश्व स्तर पर भी इसकी गंभीरता को स्वीकार किया गया है और WHO के अनुसार यदि मरीज को इस गोल्डन ऑवर के भीतर इलाज मिल जाए, तो स्थायी मस्तिष्क क्षति का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। कई मामलों में यही समय मरीज की रिकवरी और जीवन दोनों को सुरक्षित रखने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
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