आज की बदलती जीवनशैली में विटामिन बी12 का नाम अक्सर सुनने को मिलता है, लेकिन इसके बारे में उतनी ही गलत धारणाएं भी फैली हुई हैं। कई लोग मानते हैं कि यह सिर्फ शाकाहारियों में कमी करता है, जबकि कुछ इसे तुरंत ऊर्जा देने वाला चमत्कारी तत्व समझ लेते हैं। सच्चाई यह है कि विटामिन बी12 शरीर में नसों, लाल रक्त कणिकाओं और दिमाग के सुचारू कार्य के लिए अत्यंत आवश्यक है, और इसकी कमी किसी के साथ भी हो सकती है। यदि यह कमी समय पर न पकड़ी जाए तो परिणाम लंबे समय तक प्रभाव छोड़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि इसके बारे में फैल चुकी गलतफहमियों को समझा जाए।
क्या बी12 की कमी सिर्फ शाकाहारियों में होती है?
यह सबसे अधिक प्रचलित मिथ है कि विटामिन बी12 केवल शाकाहारी लोगों में कमी करता है। हालांकि इसके मुख्य स्रोत पशु-आधारित खाद्य पदार्थ होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मांसाहारी लोगों में इसकी कमी नहीं हो सकती। बी12 के अवशोषण की प्रक्रिया शरीर के आंतरिक कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें पेट का अम्ल और इंट्रिंसिक फैक्टर प्रमुख हैं। उम्र बढ़ने के साथ पेट में अम्ल का स्तर कम हो जाता है, जिसके कारण बुजुर्गों में कमी का खतरा बढ़ जाता है, चाहे वे शाकाहारी हों या मांसाहारी।
क्या इसके लक्षण हमेशा गंभीर होते हैं?
बहुत से लोग मानते हैं कि जब तक लक्षण बहुत अधिक गहराए न हों, तब तक चिंता की जरूरत नहीं। लेकिन बी12 की कमी की शुरुआत अक्सर बेहद हल्के संकेतों से होती है, जैसे लगातार थकान, चिड़चिड़ापन, याददाश्त कमजोर पड़ना या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई। इन लक्षणों को लोग सामान्य तनाव या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह एनीमिया, नसों को नुकसान और संतुलन बिगाड़ने जैसी गंभीर समस्याओं तक पहुंच सकता है।
क्या फोर्टिफाइड फूड से पूरी जरूरत पूरी हो जाती है?
आजकल कई खाद्य उत्पादों में विटामिन बी12 मिलाया जाता है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त नहीं होता। जिन लोगों के शरीर में अवशोषण की समस्या होती है, उन्हें इन फूड्स से मिलने वाला बी12 पूरी तरह उपयोग में नहीं आता। इस तरह ऐसे लोग फोर्टिफाइड फूड लेने के बावजूद कमी से जूझते रह सकते हैं।
क्या सभी सप्लीमेंट एक जैसे असर करते हैं?
एक और आम गलतफहमी यह है कि सभी बी12 सप्लीमेंट समान तरीके से काम करते हैं। वास्तविकता यह है कि इसकी दवा का चयन कमी की गंभीरता और अवशोषण क्षमता पर निर्भर करता है। हल्की कमी में सामान्य टैबलेट्स असरकारी होती हैं, जबकि अवशोषण की समस्या होने पर सबलिंगुअल सप्लीमेंट या इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी वजह से बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेना सही नहीं माना जाता।
क्या सामान्य ब्लड टेस्ट से पूरी स्थिति पता चल जाती है?
कई बार ब्लड में विटामिन बी12 का स्तर सामान्य दिखाई देता है, लेकिन शरीर में वास्तविक कमी मौजूद रहती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर विशेष जांचें, जैसे मिथाइलमैलोनिक एसिड और होमोसिस्टीन टेस्ट की सलाह देते हैं। ये शरीर में बी12 की वास्तविक क्रियाशीलता का स्पष्ट संकेत देते हैं और असल कमी की पहचान करने में मदद करते हैं।
क्यों जरूरी है समय पर पहचान और उपचार?
विटामिन बी12 की कमी धीरे-धीरे असर करती है और यदि समय पर नहीं पकड़ी जाए तो नसों व दिमाग पर स्थायी प्रभाव छोड़ सकती है। लगातार थकान, हाथ पैर में झनझनाहट, भूलने की आदत, चक्कर या ध्यान न लगना जैसे संकेतों को हल्के में न लेकर समय रहते जांच कराना आवश्यक है। बी12 की कमी केवल शाकाहारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी को भी प्रभावित कर सकती है, खासकर बुजुर्गों और पाचन समस्या वाले लोगों को। सही जानकारी, डॉक्टर की सलाह और उचित सप्लीमेंट ही इसका सुरक्षित समाधान हैं।
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