होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और आगे चलकर अरब सागर तथा हिंद महासागर से जुड़ जाता है। भौगोलिक रूप से यह समुद्र का एक संकरा मार्ग है, लेकिन इसका वैश्विक महत्व अत्यंत विशाल है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देश जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर अपना अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक भेजते हैं। यही कारण है कि इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा भी कहा जाता है।
भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक महत्व
यह जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया में स्थित है, जिसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात स्थित हैं। अपनी सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है, जबकि जहाजों के आवागमन के लिए निर्धारित मार्ग इससे भी संकरे हैं। इस कारण यहां से गुजरने वाले जहाजों को बेहद सावधानी से नियंत्रित समुद्री मार्गों से गुजरना पड़ता है। यही संकीर्णता इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बनाती है, क्योंकि यदि किसी कारण से यहां अवरोध उत्पन्न हो जाए तो विश्व व्यापार तुरंत प्रभावित हो सकता है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में निर्णायक भूमिका
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग पाँचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसके अतिरिक्त कतर से निर्यात होने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा भाग भी इसी रास्ते से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। एशिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश जैसे भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में थोड़ी-सी भी राजनीतिक या सैन्य हलचल अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को तुरंत प्रभावित कर देती है।
इतिहास में बढ़ता महत्व
भौगोलिक दृष्टि से यह जलडमरूमध्य लाखों वर्षों से अस्तित्व में है, लेकिन इसका वास्तविक रणनीतिक और आर्थिक महत्व बीसवीं सदी में बढ़ा, जब मध्य-पूर्व में बड़े पैमाने पर तेल और गैस के भंडार खोजे गए। उन्नीस सौ साठ और सत्तर के दशक में खाड़ी देशों में तेल उत्पादन बढ़ने के साथ यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य केंद्र बन गया। तभी से यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो जाए तो क्या होगा
यदि किसी सैन्य संघर्ष या राजनीतिक संकट के कारण यह मार्ग बंद हो जाता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी ऊर्जा आवश्यकताओं पर पड़ेगा, जिससे परिवहन, उत्पादन और खाद्य वस्तुओं की लागत बढ़ेगी और महंगाई तेज हो सकती है। विशेष रूप से भारत और चीन जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका अधिक आर्थिक दबाव पड़ेगा। इसके अतिरिक्त वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हो सकती हैं और दीर्घकालिक संकट की स्थिति में वैश्विक मंदी का खतरा भी पैदा हो सकता है।
अतीत में भी रह चुका है तनाव का केंद्र
इतिहास में कई बार इस क्षेत्र को लेकर गंभीर तनाव की स्थिति बन चुकी है। विशेष रूप से उन्नीस सौ अस्सी के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान तथाकथित “टैंकर युद्ध” में कई तेल टैंकरों पर हमले हुए थे। हालांकि अब तक यह जलमार्ग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, क्योंकि ऐसा होने पर इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और अंतरराष्ट्रीय दबाव तुरंत बढ़ जाता है।
क्या दुनिया इसके बिना चल सकती है
यदि यह मार्ग थोड़े समय के लिए भी बंद हो जाए तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। हालांकि कुछ देशों ने पाइपलाइन जैसे वैकल्पिक मार्ग विकसित किए हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है और वे पूरी आपूर्ति की भरपाई नहीं कर सकते। भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा का महत्व बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा अभी भी तेल और गैस पर ही निर्भर है। इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिरता और सुरक्षा आज भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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