देश में मानसून की औपचारिक दस्तक के साथ ही मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 5 जून के लिए जारी अपने ताजा पूर्वानुमान में उत्तर, पूर्व, मध्य और दक्षिण भारत के अनेक राज्यों में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। कई इलाकों में हवा की गति 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे पेड़ों के गिरने, यातायात बाधित होने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। विशेष रूप से पूर्वी भारत के राज्यों में वज्रपात और ओलावृष्टि की आशंका को देखते हुए लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
मानसून की सक्रियता से बदला मौसम का मिजाज
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में नमी की मात्रा बढ़ी है, जिससे व्यापक स्तर पर वर्षा गतिविधियां विकसित हो रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने के कारण बादल तेजी से विकसित हो रहे हैं। यही वजह है कि अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में मौसम अस्थिर बना रह सकता है। मानसून की यह प्रारंभिक सक्रियता कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ आने वाले तूफानी हालात चुनौती भी पैदा कर सकते हैं।
पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण का संयुक्त असर
मौसम विभाग ने बताया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उससे सटे क्षेत्रों के निचले तथा मध्य क्षोभमंडलीय स्तरों पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके अलावा पूर्वी-मध्य अरब सागर और तटीय कर्नाटक के समीप एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण भी मौजूद है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से वातावरण में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसके कारण गरज-चमक के साथ व्यापक वर्षा और तेज हवाओं की स्थिति बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मौसमी प्रणालियों का असर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है।
19 राज्यों में बारिश और आंधी का व्यापक अलर्ट
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और असम में तेज बारिश और आंधी की संभावना है। कई क्षेत्रों में अचानक मौसम बिगड़ सकता है और अल्प समय में भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी जलभराव और यातायात अवरोध जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
पूर्वी भारत में वज्रपात और ओलावृष्टि का बढ़ा खतरा
पूर्वी भारत के कई जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात की घटनाएं बढ़ने की आशंका जताई गई है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि की भी संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की परिस्थितियों में खुले मैदानों, खेतों और ऊंचे स्थानों पर मौजूद लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बिजली गिरने की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती हैं, इसलिए प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष सावधानी जरूरी
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़क मार्ग अवरुद्ध होने की आशंका बनी हुई है। पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों को मौसम की ताजा जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां भी सतर्क मोड पर हैं।
किसानों और आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण समय
मौसम में यह बदलाव किसानों के लिए मिश्रित संकेत लेकर आया है। जहां वर्षा खरीफ फसलों की तैयारी के लिए लाभदायक साबित हो सकती है, वहीं तेज हवाएं और ओलावृष्टि खेतों में नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। दूसरी ओर शहरों में रहने वाले लोगों को भी तेज हवाओं और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के शुरुआती चरण में ऐसी गतिविधियां सामान्य हैं, लेकिन सतर्कता ही किसी भी संभावित नुकसान को कम कर सकती है।
देशभर में मौसम की तेजी से बदलती परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। आने वाले दिनों में वर्षा गतिविधियों के और अधिक व्यापक होने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन, किसानों और आम नागरिकों को मौसम संबंधी प्रत्येक अपडेट पर नजर बनाए रखना आवश्यक होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति का समय रहते सामना किया जा सके।