अटलांटा. G20 विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक शनिवार को अटलांटा में प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनाए बिना समाप्त होने जा रही है। वार्ता के दौरान वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर एक राय नहीं बन पाई। बैठक की शुरुआत से ही मतभेद छाए रहे। समूह के सदस्य देशों के बीच गहरे विभाजन उजागर हुए। आम सहमति की कमी के कारण पारंपरिक नतीजे निकलना मुश्किल हो गया। राजनयिक स्तर पर चर्चाएं जारी रहीं लेकिन निष्कर्ष तक पहुंचना संभव नहीं हुआ।
यूक्रेन-रूस मुद्दे पर मतभेद
यूक्रेन के खिलाफ रूस के हमले को लेकर नाराजगी साफ दिखी। इस मुद्दे पर सदस्य देशों के रुख में भारी अंतर रहा। कुछ देश रूस की आलोचना पर जोर देते रहे जबकि अन्य पक्ष संतुलित भाषा के पक्ष में थे। युद्ध जारी होने के कारण साझा रुख तय करना चुनौतीपूर्ण बना रहा। सुरक्षा संबंधी अन्य मुद्दों पर भी सहमति नहीं बन पाई। मतभेदों ने पूरे एजेंडे को प्रभावित किया। वैश्विक मंच पर एकजुटता का अभाव साफ झलका।
संयुक्त बयान की जगह अध्यक्षीय बयान
सूत्रों के अनुसार समूह संयुक्त बयान जारी नहीं करेगा। इसके बजाय बैठक में हुई चर्चा का सार प्रस्तुत करने वाला अध्यक्षीय बयान जारी किया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो बैठक के समापन पर यह बयान जारी करेंगे। संयुक्त दस्तावेज पर सहमति न बन पाने के कारण यह विकल्प अपनाया गया। अध्यक्षीय बयान चर्चाओं का सारांश होगा न कि सर्वसम्मत निष्कर्ष। पारंपरिक जी20 प्रक्रिया से यह अलग रुख है। मतभेदों की स्वीकारोक्ति के रूप में इसे देखा जा रहा है।
समूह तस्वीर कार्यक्रम रद्द
रुबियो ने वार्ता की शुरुआत एकजुटता की अपील के साथ की थी। लेकिन शुक्रवार को उन्होंने विदेश मंत्रियों की पारंपरिक समूह तस्वीर लेने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। यूरोपीय राजनयिकों ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई थी। तस्वीर खिंचवाने के दौरान बहिष्कार करने या वहां से चले जाने की चेतावनी दी गई थी। कार्यक्रम रद्द होने से तनाव साफ दिखा। प्रतीकात्मक एकजुटता भी संभव नहीं हो सकी।
यूरोपीय आपत्ति और बहिष्कार की चेतावनी
यूरोपीय देशों ने लावरोव की उपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया। समूह तस्वीर में शामिल होने से इनकार की संभावना जताई गई। यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोपीय पक्ष की नाराजगी स्पष्ट रही। अमेरिकी मेजबानी में भी इस विभाजन को संभालना मुश्किल साबित हुआ। राजनयिक शिष्टाचार और राजनीतिक मतभेद आमने-सामने आ गए। बैठक के औपचारिक कार्यक्रम प्रभावित हुए। तनावपूर्ण माहौल में चर्चाएं चलीं।
पोलैंड विदेश मंत्री का बयान
पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें इस बात पर आश्चर्य नहीं है कि बैठक में आम सहमति नहीं बन पाई। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि युद्ध चल रहे हैं और उन युद्धों में शामिल देश भी वार्ता की मेज पर मौजूद हैं। ऐसे में किसी साझा रुख पर सहमत होना बेहद मुश्किल है। उनके बयान ने मौजूदा वैश्विक वास्तविकता को रेखांकित किया। युद्ध की छाया में बहुपक्षीय मंच की सीमाएं उजागर हुईं। सहमति की कठिनाई को स्वीकार किया गया।