मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अब समुद्री मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है। फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास भारतीय सीफेयरर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में भारतीय क्रू वाले 3 विदेशी जहाज अलग-अलग घटनाओं में हमले की चपेट में आए हैं। राहत की बात यह है कि अब तक किसी भारतीय सीफेयरर की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।
इन घटनाओं के बाद खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। समुद्री मार्ग पर तनाव का सीधा असर जहाजों की आवाजाही, क्रू की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ऐसे में भारतीय हितों से जुड़े जहाजों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी महत्वपूर्ण हो गई है।
14 जहाजों पर 173 भारतीय सीफेयरर्स मौजूद
मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फारस की खाड़ी के भीतर भारतीय हितों से जुड़े 14 जहाज मौजूद हैं। इनमें 6 भारतीय ध्वज वाले और 8 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं। इन जहाजों पर कुल 173 भारतीय सीफेयरर्स काम कर रहे हैं।
मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए इनमें से 10 जहाजों को सुरक्षित स्थानों तक निकालने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य भारतीय क्रू को संभावित खतरे वाले समुद्री क्षेत्र से दूर करना और किसी भी आपात स्थिति में उनकी सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना है।
24 घंटे में 3 जहाज हमले की चपेट में
8 और 9 सितंबर को जिम्बाब्वे ध्वज वाले टैंकर रिएस्को, पलाऊ ध्वज वाले गैस कैरियर होराइजन 1 और लाइबेरिया ध्वज वाले टैंकर मेर्सिन प्रॉस्पेरिटी अलग-अलग घटनाओं में हमले की चपेट में आए। तीनों घटनाओं ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इन हमलों में किसी भारतीय सीफेयरर की मौत की सूचना नहीं है। हालांकि, जहाजों पर मौजूद भारतीय क्रू की संख्या और घटनाओं की निकटता को देखते हुए स्थिति को संवेदनशील माना जा रहा है। समुद्री क्षेत्र में किसी भी नए हमले की स्थिति में जोखिम और बढ़ सकता है।
रिएस्को के 21 भारतीय क्रू पहले ही सुरक्षित निकाले गए
रिएस्को टैंकर पर 21 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। हमले से पहले ही सभी भारतीय सीफेयरर्स को ईरान के एक बंदरगाह पर सुरक्षित आश्रय में पहुंचा दिया गया था। समय रहते क्रू को जहाज से अलग सुरक्षित स्थान पर ले जाने से किसी बड़े नुकसान की आशंका टल गई।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में जहाजों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना कितना महत्वपूर्ण हो गया है। संभावित खतरे की स्थिति में क्रू को पहले से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।
होराइजन 1 से 14 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
पलाऊ ध्वज वाले गैस कैरियर होराइजन 1 में कुल 16 सदस्यीय क्रू था, जिसमें 14 भारतीय और 2 जॉर्जियाई नागरिक शामिल थे। घटना के बाद दूसरे जहाज की मदद से पूरे क्रू को सुरक्षित निकाल लिया गया। इससे भारतीय सीफेयरर्स को किसी बड़े नुकसान से बचाया जा सका।
होराइजन 1 की घटना ऐसे समय हुई है जब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास जहाजों की सुरक्षा पहले ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। भारतीय क्रू की बड़ी मौजूदगी को देखते हुए इस समुद्री क्षेत्र में प्रत्येक घटना पर भारत की निगाह बनी रहना स्वाभाविक है।
मेर्सिन प्रॉस्पेरिटी को नुकसान, 7 भारतीय सुरक्षित
लाइबेरिया ध्वज वाले टैंकर मेर्सिन प्रॉस्पेरिटी में 7 भारतीय सीफेयरर्स मौजूद थे। हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी भारतीय क्रू सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद जहाज पर मौजूद भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी गई।
लगातार तीन जहाजों के अलग-अलग घटनाओं में प्रभावित होने से यह संकेत मिलता है कि क्षेत्र में समुद्री आवाजाही के लिए जोखिम बढ़ गया है। ऐसे में भारतीय हितों से जुड़े जहाजों को सुरक्षित मार्ग और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना प्राथमिकता बन गया है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है इतना अहम?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी से बाहर निकलने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी लंबे समय तक चलने वाले तनाव या व्यवधान का असर ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
भारत के लिए इसका महत्व और अधिक है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से आने वाले आयात पर निर्भर करता है। इसलिए इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव केवल भारतीय सीफेयरर्स की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
10 जहाजों को सुरक्षित निकालने की तैयारी
फारस की खाड़ी में भारतीय हितों से जुड़े 14 जहाजों और उन पर मौजूद 173 भारतीय सीफेयरर्स की स्थिति को देखते हुए 10 जहाजों को सुरक्षित क्षेत्र में निकालने की तैयारी की जा रही है। मौजूदा घटनाक्रम में प्राथमिकता किसी भी संभावित हमले से पहले क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच भारतीय सीफेयरर्स की सुरक्षित निकासी और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो गई है। यदि क्षेत्रीय तनाव आगे बढ़ता है, तो समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।