ईरान में सत्ता के शीर्ष पर बड़ा बदलाव हुआ है। राजधानी में हुए भीषण हवाई हमले में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे को देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है। इस घटना के बाद पूरे देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है, जबकि सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी भी लागू की गई है।
तेहरान हवाई हमले में गई अली खामेनेई की जान
सरकारी मीडिया के अनुसार 28 फरवरी को तेहरान में हुए हवाई हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई के आधिकारिक कार्यालय को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 86 वर्षीय खामेनेई की मौके पर ही मौत हो गई। सरकार का कहना है कि हमला विशेष रूप से सरकारी और रणनीतिक ठिकानों पर केंद्रित था। घटना के बाद से राजधानी समेत सभी बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इमारतों के बाहर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में गहरा शोक व्याप्त है। सरकार ने 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा करते हुए कहा है कि इस दौरान सभी सरकारी कार्यक्रम सीमित रहेंगे। सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी के साथ-साथ देशभर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सीमाओं, सैन्य ठिकानों और प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।
कौन हैं नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई
नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद शहर में हुआ था। उन्होंने धार्मिक वातावरण में शिक्षा प्राप्त की और ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दौर में रिवोल्यूशनरी गार्ड से भी जुड़े रहे। वे लंबे समय से अपने पिता के बेहद करीबी माने जाते थे और पर्दे के पीछे रहकर कई अहम राजनीतिक और सुरक्षा फैसलों में प्रभावी भूमिका निभाते रहे हैं।
हालांकि मोजतबा खामेनेई ने कभी कोई औपचारिक बड़ा सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन उन्हें अली खामेनेई का सबसे भरोसेमंद सलाहकार माना जाता था। सेना और अर्धसैनिक बलों में उनकी मजबूत पकड़ बताई जाती है, जिसे उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
2009 के विरोध प्रदर्शनों में आया था नाम
साल 2009 में ईरान में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी मोजतबा खामेनेई का नाम सुर्खियों में आया था। आरोप लगे थे कि आंदोलन को सख्ती से दबाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद से ही उन्हें सत्ता के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाने लगा था।
मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद ईरान में नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान वंश के आधार पर सत्ता सौंपने का विरोध किया गया था, ऐसे में अब पिता के बाद बेटे के सर्वोच्च नेता बनने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठान के मजबूत समर्थन के चलते मोजतबा खामेनेई को फिलहाल एक सशक्त नेता के रूप में देखा जा रहा है।आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मोजतबा खामेनेई का नेतृत्व ईरान को किस राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय दिशा में लेकर जाता है।
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