ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालिबाफ ने रविवार को कहा कि तेहरान हार्मुज जलडमरूमध्य को तब तक नहीं खोलेगा जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं और अमेरिकी प्रतिबद्धताएं लागू नहीं होतीं। अर्ध-आधिकारिक फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार कालिबाफ ने जोर दिया कि ईरान को लड़ना भी होगा और बातचीत भी करनी होगी। उन्होंने कहा कि तेहरान दुश्मनों को पीछे धकेलने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल करेगा और सही समय पर युद्धक्षेत्र के लाभों को मजबूत करने के लिए कूटनीति का सहारा लेगा। यह बयान चल रहे तनाव के बीच ईरान की स्पष्ट नीति को रेखांकित करता है।
वार्ता के लिए सात शर्तें पेश
ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को सात मांगें भेजी हैं जिन्हें युद्ध समाप्त करने के लिए संभावित आधार माना जा रहा है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजई ने कहा कि तेहरान वाशिंगटन से जवाब का इंतजार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कतर के माध्यम से शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई गई हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है। इन मांगों में सभी मोर्चों पर तत्काल शत्रुता समाप्त करना, ईरानी संपत्तियों की रिहाई और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शामिल है। ईरानी राजनयिक के अनुसार ये शर्तें वार्ता की नींव बन सकती हैं।
संघर्ष की शुरुआत और हार्मुज का बंद होना
अमेरिका-ईरान संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के समन्वित हवाई हमलों से शुरू हुआ था। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इसके परिणामस्वरूप ईरान ने हार्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया जो वैश्विक तेल शिपिंग का महत्वपूर्ण मार्ग है। इस कदम से ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। संकट और गहरा हो गया क्योंकि यह जलमार्ग विश्व के तेल व्यापार के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है।
जवाबी कार्रवाई और जारी तनाव
ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच कई दौर के हमले हुए जिससे संघर्ष और तीव्र हो गया। दोनों पक्षों के बीच सैन्य तनाव जारी रहने के बावजूद कूटनीतिक प्रयास भी चल रहे हैं। कतर जैसे मध्यस्थ के जरिए संपर्क बनाए रखा गया है लेकिन ठोस प्रगति अभी नहीं हुई है। हार्मुज जलडमरूमध्य का बंद रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाए हुए है।
आगे की राह और शर्तों का महत्व
कालिबाफ के बयान से साफ है कि ईरान सैन्य और कूटनीतिक दोनों विकल्पों को एक साथ अपनाए हुए है। तेहरान तब तक हार्मुज नहीं खोलेगा जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं। रजई के अनुसार कतर के माध्यम से संपर्क जारी है और अमेरिका के जवाब का इंतजार है। वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शर्तों पर सहमति बनने तक तनाव कम होने की संभावना कम है।