तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात अब उस मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां एक ओर ईरान युद्ध से बचने की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका लगातार आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने स्पष्ट कहा है कि वह किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर हमला हुआ तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा।
ईरान का रुख: युद्ध नहीं, लेकिन जवाब तय
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान का रुख साफ है—देश शांति चाहता है, लेकिन किसी भी तरह के हमले या दबाव को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कड़ा कदम उठाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में पहले से ही सैन्य तनाव बना हुआ है।
अमेरिका ने बढ़ाया आर्थिक दबाव, नए प्रतिबंध लागू
दूसरी ओर अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के ऊर्जा और बैंकिंग सेक्टर पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, एक ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई की गई है जो दक्षिण और पूर्वी एशिया में ईरानी LPG की अवैध बिक्री कर रहा था। अमेरिका का आरोप है कि ईरानी गैस को गलत तरीके से ओमान की LPG बताकर बेचा जा रहा था ताकि उसकी असली पहचान छिपाई जा सके। इस कार्रवाई में 12 संस्थाओं और 6 जहाजों को प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है, जिनमें कई कंपनियां UAE, चीन और मार्शल आइलैंड्स से जुड़ी हैं।
कैसे बढ़ा विवाद?
हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कई घटनाओं के बाद तेज हुआ है। सबसे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आईं, जहां अमेरिकी सेना ने ईरानी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के रडार ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की घटना हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया।
मिसाइल हमलों और जवाबी दावों से बढ़ा तनाव
इसके बाद अमेरिका ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर 7 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से अधिकतर को इंटरसेप्ट कर लिया गया। वहीं ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई के दावे सामने आए, जिसमें IRGC ने दुश्मन ठिकानों पर मिसाइल हमले की बात कही। हालांकि दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के दावों को खारिज कर रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल होती जा रही है।
ट्रम्प के दावे और अलग-अलग रिपोर्ट्स
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता लगभग 22% ही बची है। हालांकि अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स इससे अलग तस्वीर पेश करती हैं, जिनमें कहा गया है कि ईरान ने अपने कई मिसाइल ठिकानों को फिर से सक्रिय कर लिया है और उसका बड़ा हथियार भंडार अभी भी मौजूद है।
लेबनान, कुवैत और इजराइल तक तनाव
इस पूरे संघर्ष का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है। दक्षिणी लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई, कुवैत में मिसाइल और ड्रोन अलर्ट, और होर्मुज क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियों ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। कई देशों ने सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिए हैं और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
तनाव के बीच बड़ा सवाल- आगे क्या?
ईरान और अमेरिका के बीच यह टकराव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आर्थिक प्रतिबंध, ड्रोन हमले और मिसाइल कार्रवाई तक पहुंच चुका है। एक तरफ ईरान बातचीत की संभावना खुली रखने की बात कर रहा है, वहीं अमेरिका दबाव और सैन्य कार्रवाई दोनों रास्तों पर आगे बढ़ता दिख रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह तनाव युद्ध में बदलता है या कूटनीति के जरिए कोई रास्ता निकलता है।