नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पेपर लीक के मुद्दे और युवाओं के विरोध-प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा नया नहीं है और इसे उनकी पार्टी लंबे समय से उठाती रही है। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने के बावजूद दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवा वर्षों तक मेहनत करते हैं, जबकि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है, तो छात्रों की मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं।
'बार-बार पेपर लीक, लेकिन कार्रवाई नहीं'
प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश में काम करने के दौरान हुई पेपर लीक की घटनाएं याद हैं। उन्होंने दावा किया कि उस समय केवल निचले स्तर के एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई और बाद में मामला आगे नहीं बढ़ा। उनके अनुसार, जब तक वास्तविक जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल है।
'युवा पूछ रहे हैं कि कब तक संघर्ष करें?'
कांग्रेस सांसद ने कहा कि आज देश के युवा निराश हैं और यह सवाल पूछ रहे हैं कि उन्हें कब तक केवल संघर्ष करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद यदि परीक्षा रद्द हो जाए या पेपर लीक हो जाए, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान युवाओं और उनके परिवारों को होता है।
उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और उनके भरोसे का भी सवाल है। इसलिए सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।
मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रियंका गांधी ने संबंधित मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी परिस्थितियों में मंत्री जिम्मेदारी स्वीकार करते थे। साथ ही उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की।
सरकार पर लगाए आरोप
अपने बयान में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर युवाओं, किसानों और गरीबों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय युवाओं की समस्याओं का समाधान करना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
पेपर लीक का मुद्दा क्यों बना बड़ी चिंता?
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों और जांच ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। बार-बार सामने आने वाली ऐसी घटनाओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने और लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।