बिहार सरकार ने सोशल मीडिया पर बढ़ते दुरुपयोग, फेक न्यूज और अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सभी जिलों में मीडिया मॉनिटरिंग सेल का गठन किया जाएगा, जो सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी करेगा।
बिहार सरकार का बड़ा फैसला, सोशल मीडिया पर रहेगी कड़ी नजर
बिहार सरकार ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों, फर्जी खबरों, अभद्र भाषा और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कंटेंट पर सख्ती बढ़ाने का निर्णय लिया है। मंत्रिमंडल ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA), 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकेगी, जिनकी ऑनलाइन गतिविधियों से सामाजिक तनाव या अशांति फैलने की आशंका होगी। सरकार ने सभी जिलों में ‘जिला स्तरीय मीडिया मॉनिटरिंग-सह-मीडिया प्रबंधन कोषांग’ बनाने का फैसला भी किया है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नजर रखेगा।

फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स की होगी निगरानी
मुख्य सचिव द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, जिला स्तर पर गठित टीमें समाचार पत्रों, न्यूज पोर्टल, टीवी चैनलों के साथ-साथ फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निगरानी करेंगी। यदि किसी पोस्ट, वीडियो, रील या समाचार में गलत, भ्रामक या तथ्यहीन जानकारी पाई जाती है, तो संबंधित विभाग से तथ्य जुटाकर उसका खंडन कराया जाएगा। साथ ही अफवाह फैलाने वाले अकाउंट की पहचान कर पोस्ट हटाने, प्रोफाइल बंद कराने और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में बनेगी जिला कमेटी
सरकार के आदेश के अनुसार, प्रत्येक जिले में मीडिया मॉनिटरिंग समिति का गठन होगा, जिसकी अध्यक्षता अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) करेंगे। समिति में पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), साइबर डीएसपी, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी और जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी शामिल होंगे। जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी (DPRO) को इस कोषांग का नोडल अधिकारी बनाया गया है। यह टीम सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
CCA कानून के तहत हो सकती है कार्रवाई
संशोधित प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यक्ति की सोशल मीडिया गतिविधि से कानून-व्यवस्था बिगड़ने, सांप्रदायिक तनाव फैलने या सामाजिक शांति भंग होने की आशंका होती है, तो उसके खिलाफ बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) के तहत कार्रवाई की जा सकती है। जिलाधिकारी को ऐसे मामलों में कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। इसके तहत संबंधित व्यक्ति को तीन महीने तक निरुद्ध किया जा सकता है। साथ ही जिला बदर करने या नियमित रूप से थाने में हाजिरी लगाने जैसे आदेश भी दिए जा सकते हैं।
पहले BNS और IT एक्ट के तहत होती थी कार्रवाई
अब तक सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और अन्य साइबर कानूनों के तहत कार्रवाई होती थी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नया प्रावधान प्रशासन को अतिरिक्त अधिकार देगा, लेकिन इसका उपयोग कानून के दायरे में और संतुलित तरीके से होना चाहिए। पूर्णिया के अधिवक्ता आशुतोष कुमार झा के अनुसार, किसी भी मामले में अंतिम निर्णय अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनों के आधार पर करती है और कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी बनी रहेगी नजर
कानूनी विशेषज्ञों और पत्रकार संगठनों ने कहा है कि फेक न्यूज और अफवाहों को रोकने के लिए सख्त व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।
पूर्णिया प्रेस क्लब के अध्यक्ष मिथलेश कुमार सिंह ने कहा कि गलत सूचना फैलाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसका उपयोग राजनीतिक दबाव, व्यक्तिगत दुश्मनी या वैध आलोचना को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र में निष्पक्ष पत्रकारिता और तथ्यों के आधार पर सवाल उठाने की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।
क्या बदलेगा? एक नजर में
| प्रावधान | नई व्यवस्था |
|---|---|
| निगरानी | फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, एक्स सहित सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म |
| जिला समिति | अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में गठन |
| नोडल अधिकारी | जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी |
| कानूनी कार्रवाई | CCA, BNS और IT Act के तहत |
| संभावित दंड | 3 महीने तक निरुद्ध, जिला बदर, थाने में हाजिरी |