Nepal Flood Update: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। लैंडस्लाइड के बाद नदी में अचानक पानी और मलबा आने से नेपाल में 175 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कों और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच नेपाली सेना और अन्य राहत एजेंसियां लगातार लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं। गुरुवार सुबह रसुवा के टिमुरे इलाके से 116 लोगों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
लैंडस्लाइड के बाद नदी में आया सैलाब, मचा हाहाकार
यह हादसा नेपाल-चीन सीमा के पास बुधवार सुबह हुआ। शुरुआती जानकारी में इलाके में तेज झटके महसूस होने की बात सामने आई थी। बाद में स्थिति साफ हुई कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में आ गिरा था। पहाड़ से बड़ी मात्रा में मलबा नदी में गिरने के बाद पानी का प्रवाह अचानक बढ़ गया और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी नदी चीन के तिब्बत क्षेत्र से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।
178 लोगों की मौत, बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता
हादसे में अब तक 178 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें नेपाल में 175 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई है। वहीं, लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक नेपाल में 826 लोग लापता हैं। इनमें 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक बताए जा रहे हैं। दूसरी तरफ तिब्बत में भी 550 से ज्यादा लोगों का सुराग नहीं मिल पाया है। चीन की सरकारी वेबसाइट CCTV ने भी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। ऐसे में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 1,500 तक पहुंचती है।
21 भारतीयों समेत 116 लोगों का रेस्क्यू
हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे से गुरुवार सुबह 116 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू किए गए लोगों में 95 नेपाली नागरिक और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इससे पहले से लापता भारतीयों की तलाश में जुटी एजेंसियों को भी राहत मिली है। हालांकि, अभी भी 300 से अधिक भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी के कारण चिंता बनी हुई है। रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रही हैं।
भूकंप नहीं, लैंडस्लाइड से आया था तेज झटका
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए थे। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS की ओर से इसे 4.4 तीव्रता के भूकंप के तौर पर बताया गया था। लेकिन बाद की जांच में सामने आया कि जमीन में महसूस किया गया तेज कंपन किसी सामान्य भूकंप की वजह से नहीं, बल्कि पहाड़ के बड़े हिस्से के टूटकर नदी में गिरने के कारण हुआ था। बाद में USGS ने भी स्पष्ट किया कि यह घटना करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जितना झटका पैदा करने वाली लैंडस्लाइड से जुड़ी थी।
बर्फ और चट्टानों के मलबे ने बढ़ाई मुश्किल
पहाड़ का बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरने के कारण नदी का बहाव प्रभावित हुआ। अचानक आई बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आगे बढ़ी। इससे सीमा क्षेत्र में सड़क और संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। खराब मौसम ने राहत एवं बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कई जगहों पर प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
भारतीय नागरिकों की तलाश पर नजर
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना के बाद भारत की भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर है। राहत और बचाव अभियान में 21 भारतीयों के सुरक्षित निकाले जाने के बाद अब बाकी लोगों की तलाश महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल बचाव दलों की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचना और लापता लोगों का पता लगाना है। मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य होने के साथ रेस्क्यू अभियान में तेजी आने की उम्मीद है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर क्यों मुश्किल है रेस्क्यू ऑपरेशन?
नेपाल-तिब्बत सीमा का इलाका पहाड़ी और दुर्गम है। यहां अचानक बाढ़ के साथ भूस्खलन होने पर सड़क संपर्क बाधित हो जाता है। ऐसे में राहत टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में परेशानी होती है। मौजूदा हालात में भी खराब मौसम और टूटे रास्तों के बीच रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लापता लोगों तक पहुंचने में समय लग रहा है।
लाइव अपडेट्स
NDRF की टीमें स्टैंडबाय पर
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद NDRF की टीमें अलर्ट मोड पर रखी गई हैं और आदेश मिलते ही उन्हें रवाना किया जा सकता है। NDRF के IG नरेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि फिलहाल भारत की कोई टीम नेपाल नहीं भेजी गई है, लेकिन नेपाल सरकार की ओर से मदद का अनुरोध आने और भारत सरकार की मंजूरी मिलने पर टीमें तुरंत रवाना होंगी। उन्होंने बताया कि भारत पहले ही नेपाल के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री लेकर दो विमान भेज चुका है, जिनमें जरूरी दवाइयां और राहत सामग्री शामिल है।
भारत ने नेपाल को भेजी राहत की दूसरी खेप
नेपाल में बाढ़ से बिगड़े हालात के बीच भारत ने राहत सामग्री की दूसरी खेप भेजी है। भारतीय वायुसेना के विमान से 37.5 टन राहत सामग्री, जरूरी दवाइयां और खाद्य पैकेट नेपाल रवाना किए गए हैं। इससे पहले बुधवार रात C-130J विमान के जरिए 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी। दोनों खेपों को मिलाकर भारत अब तक नेपाल को 47.5 टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है। भारत ने कहा है कि वह नेपाल सरकार के संपर्क में है और बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने व बचाव अभियान में हरसंभव सहायता जारी रखेगा।