सत्ता से हटने के बाद भारत में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से पहली बार खुले तौर पर अपने देश लौटने का संकल्प व्यक्त किया। नई दिल्ली स्थित विदेशी पत्रकारों के क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वह हर परिस्थिति में बांग्लादेश लौटेंगी और उन्हें न तो कारावास का भय है और न ही अपनी जान की चिंता। अपने संबोधन के दौरान वह कई बार भावुक भी दिखाई दीं और उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में अनेक कठिन दौर देखे हैं, लेकिन अपने समर्थकों और देश के लोगों के साथ खड़े रहने के संकल्प से पीछे नहीं हटेंगी। उनके इस बयान ने बांग्लादेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
भारत को बताया बांग्लादेश का घनिष्ठ मित्र
अपने संबोधन में शेख हसीना ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत ऐतिहासिक रूप से बांग्लादेश का घनिष्ठ मित्र रहा है। उन्होंने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और पारस्परिक संबंधों का उल्लेख करते हुए भारत के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के संबंध हाल के महीनों में विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण चर्चा में रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना का यह वक्तव्य भारत के साथ उनके राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों की निरंतरता का संकेत भी माना जा सकता है।
ढाका की तीखी प्रतिक्रिया, कार्यक्रम पर जताई आपत्ति
शेख हसीना के संबोधन के तुरंत बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी करते हुए भारत में इस कार्यक्रम के आयोजन पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की। ढाका का कहना है कि भारत की धरती से शेख हसीना को सार्वजनिक मंच उपलब्ध कराना उसकी संप्रभुता के प्रति सम्मान के अनुरूप नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि जिस दिन देश जुलाई आंदोलन की दूसरी वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा था, उसी दिन इस प्रकार का सार्वजनिक संबोधन उन लोगों की स्मृति के प्रति भी असम्मानजनक है, जिन्हें वह आंदोलन का शहीद मानती है। इस बयान ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
प्रत्यर्पण और कानूनी प्रक्रिया पर भी बनी हुई है बहस
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार लंबे समय से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करती रही है। ढाका का कहना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के आधार पर कई बार औपचारिक अनुरोध भेजे जा चुके हैं। दूसरी ओर, शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग इन आरोपों को राजनीतिक प्रेरणा से जुड़ा बताते रहे हैं। उनका कहना है कि उनके विरुद्ध की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। इस पूरे विवाद में भारत सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई नया आधिकारिक रुख सामने नहीं आया है। ऐसे में प्रत्यर्पण, कानूनी प्रक्रिया और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या पड़ सकता है प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, सामरिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग के अनेक आयामों पर आधारित हैं। इसलिए किसी एक राजनीतिक घटनाक्रम के आधार पर दोनों देशों के संबंधों का आकलन करना उचित नहीं होगा। हालांकि शेख हसीना के हालिया बयान और उस पर ढाका की प्रतिक्रिया ने यह संकेत अवश्य दिया है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। सीमा सुरक्षा, व्यापार, संपर्क परियोजनाओं और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की साझेदारी पहले से ही व्यापक है, इसलिए दोनों सरकारें इन संबंधों को संतुलित बनाए रखने का प्रयास करेंगी।
बांग्लादेश की राजनीति में फिर बढ़ी अनिश्चितता
शेख हसीना के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह स्वयं को अभी भी बांग्लादेश की सक्रिय राजनीति का हिस्सा मानती हैं। दूसरी ओर, वर्तमान अंतरिम सरकार उनके विरुद्ध गंभीर आरोपों की जांच और कानूनी कार्रवाई की बात दोहराती रही है। ऐसे में यदि भविष्य में शेख हसीना वास्तव में बांग्लादेश लौटती हैं, तो उनके सामने राजनीतिक और कानूनी दोनों प्रकार की चुनौतियां हो सकती हैं। फिलहाल उनका बयान केवल घरेलू राजनीति ही नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों और दक्षिण एशिया की कूटनीतिक परिस्थितियों पर भी नई बहस का कारण बन गया है।