नई दिल्ली. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता तथा इसे निश्चित समयसीमा में ठोस परिणामों से जोड़ना होगा। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की मांग करता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स जैसे प्रभावशाली मंच से मोदी की यह अपील भारत की कूटनीतिक प्राथमिकता को वैश्विक स्तर पर सामने लाने वाली रही।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने किया समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी के बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने भी सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताई। एक प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि परिषद की मौजूदा संरचना आज की वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक वर्तमान व्यवस्था मुख्य रूप से 1945 के दौर की दुनिया को प्रतिबिंबित करती है, जबकि आज वैश्विक शक्ति-संतुलन और देशों की भूमिका काफी बदल चुकी है।
विकासशील देशों और अफ्रीका को प्रतिनिधित्व देने की मांग
स्टीफन दुजारिक ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाली संस्था बनाने की जरूरत है। इसमें विकासशील देशों और विशेष रूप से अफ्रीका की आवाज को उचित स्थान दिए जाने की आवश्यकता बताई गई। भारत भी लंबे समय से सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों के अधिक प्रतिनिधित्व और स्थायी सदस्यता के विस्तार की वकालत करता रहा है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस आवश्यकता को स्वीकार किया जाना भारत के रुख के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
1945 की व्यवस्था से आगे बढ़ने का समय
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था से निकली थी। इसमें 5 स्थायी सदस्य हैं और कई दशक बाद भी मूल ढांचे में व्यापक बदलाव नहीं हुआ है। दुजारिक ने संकेत दिया कि सुरक्षा परिषद के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं को भी वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। भारत का तर्क भी यही रहा है कि 21वीं सदी की वास्तविकताओं को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के निर्णय लेने के ढांचे में पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए।
भारत की अध्यक्षता और नई दिल्ली घोषणा की सराहना
दुजारिक ने ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता और नई दिल्ली घोषणा में महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चा का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारत को विभिन्न पक्षों के बीच पुल बनाने और संघर्षरत पक्षों को बातचीत तथा शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रों में तनाव और संघर्ष जारी हैं। इससे भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और संवाद आधारित दृष्टिकोण को भी बल मिलता है।
संयुक्त घोषणा को बताया भारत की उपलब्धि
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने ब्रिक्स की संयुक्त घोषणा को अपनाए जाने को भारत की अध्यक्षता की उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने भारत के नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई भी दी। उनके अनुसार बहुपक्षीय व्यवस्था को मौजूदा समय में प्रासंगिक बनाए रखने के लिए संस्थागत सुधारों को गति देना जरूरी हो गया है। इस टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर भी बहुपक्षीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता को गंभीरता से देखा जा रहा है।
भारत की कूटनीतिक मुहिम को मिली नई ताकत
UNSC सुधार पर प्रधानमंत्री मोदी की अपील और उसके बाद संयुक्त राष्ट्र की ओर से आई सकारात्मक टिप्पणी को भारत की कूटनीतिक मुहिम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को कई देशों का समर्थन मिलता रहा है, लेकिन सुधार की प्रक्रिया अब भी जटिल बनी हुई है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा संरचना को आज की वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की जरूरत पर जोर भारत के पक्ष को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में और मजबूत कर सकता है। ब्रिक्स मंच से उठी आवाज का संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर प्रतिध्वनित होना नई दिल्ली के लिए निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है।