कोलकाता डेस्क: आज के समय में मोबाइल और सोशल मीडिया हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। कई लोग रात को बिस्तर पर जाने के बाद भी घंटों सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहते हैं। उन्हें लगता है कि सुबह देर तक सो लेने से नींद पूरी हो जाएगी, लेकिन शरीर के लिए सिर्फ नींद की अवधि ही नहीं, बल्कि उसका समय और नियमितता भी महत्वपूर्ण होती है। देर रात तक जागने की आदत लंबे समय में शरीर और दिमाग दोनों पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रात में देर तक जागने से सर्केडियन रिदम प्रभावित हो सकती है और नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है। इसका असर मूड, भूख, वजन और रोजमर्रा की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है। आइए जानते हैं देर रात सोने से होने वाले संभावित नुकसान और इस आदत को कैसे सुधारा जा सकता है।
देर रात सोने से सर्केडियन रिदम पर होता है असर
डॉ. शालिनी सिंह सालुंके के मुताबिक, रात में देर तक जागने की आदत शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। शरीर में एक आंतरिक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह नींद, जागने और कई शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। देर रात तक जागने और सोने का समय लगातार बदलने से यह रिदम प्रभावित हो सकती है। इसका असर नींद की गुणवत्ता और अगले दिन की ऊर्जा पर भी दिखाई दे सकता है। नींद का पैटर्न बिगड़ने पर शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इसलिए रोजाना एक नियमित समय पर सोने और उठने की कोशिश करना जरूरी है।
रात में बढ़ती है भूख, बढ़ सकता है वजन
देर रात तक जागने के दौरान कई लोगों को अचानक भूख लगने लगती है। इस समय अक्सर लोग चिप्स, मिठाई, फास्ट फूड या दूसरी हाई-कैलोरी चीजें खाने लगते हैं। रात में बार-बार स्नैकिंग की आदत लंबे समय में वजन बढ़ने का कारण बन सकती है। अनियमित नींद शरीर में भूख और पेट भरे होने से जुड़े संकेतों को भी प्रभावित कर सकती है। इससे खाने की इच्छा और क्रेविंग्स बढ़ सकती हैं। लगातार खराब नींद और अनियमित खान-पान मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी असर डाल सकते हैं। इसलिए रात में बेवजह खाने से बचना और पर्याप्त नींद लेना जरूरी है।
देर रात सोने से हो सकते हैं मूड स्विंग्स
नींद की कमी का असर केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और मूड पर भी पड़ सकता है। रोजाना देर से सोने पर अगले दिन चिड़चिड़ापन, थकान और मूड में बदलाव महसूस हो सकता है। पर्याप्त नींद न मिलने से व्यक्ति का फोकस और एकाग्रता भी प्रभावित हो सकती है। कई लोगों में नींद पूरी न होने पर तनाव और बेचैनी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, देर रात तक सोशल मीडिया देखने की आदत दिमाग को आराम देने के बजाय लगातार सक्रिय रख सकती है। इससे सोने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए सोने से पहले खुद को रिलैक्स करना और स्क्रीन टाइम कम करना फायदेमंद हो सकता है।
काम और पढ़ाई पर भी पड़ता है असर
देर रात तक जागने और पर्याप्त नींद न लेने का सीधा असर अगले दिन की दिनचर्या पर दिखाई दे सकता है। सुबह उठने में परेशानी होने के साथ दिनभर थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है। इसका असर ऑफिस के काम, पढ़ाई और रोजमर्रा के जरूरी कामों पर पड़ सकता है। नींद की कमी से ध्यान लगाने और चीजों को याद रखने में भी परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक खराब नींद की आदत स्वास्थ्य के लिए कई जोखिमों से जुड़ी हो सकती है। कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए देर रात तक जागने की आदत को सामान्य मानने के बजाय अपनी नींद की दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है।
सोने का समय करें निश्चित
देर रात सोने की आदत को सुधारने के लिए सबसे पहले सोने और उठने का एक निश्चित समय तय करें। कोशिश करें कि रोजाना लगभग एक ही समय पर बिस्तर पर जाएं और सुबह भी तय समय पर उठें। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे स्क्रीन वाले डिवाइस से दूरी बनाने की कोशिश करें। बिस्तर पर जाने के बाद सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत से बचें। अगर लंबे समय से देर रात जागने की आदत है, तो सोने का समय अचानक बदलने के बजाय धीरे-धीरे पहले कर सकते हैं। सोने से पहले हल्की गतिविधियां, किताब पढ़ना या शांत माहौल में समय बिताना रिलैक्स करने में मदद कर सकता है। अगर नींद की परेशानी लगातार बनी रहती है या इसका असर रोजमर्रा के काम पर पड़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए केवल जल्दी सोना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्याप्त, नियमित और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद लेना भी जरूरी है। देर रात सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत को कम करना नींद की दिनचर्या सुधारने की दिशा में एक आसान कदम हो सकता है।