कोलकाता: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जरूरत बन चुका है, लेकिन कब यह जरूरत लत में बदल जाती है, इसका एहसास अक्सर देर से होता है। सोशल मीडिया, गेमिंग और लगातार नोटिफिकेशन की आदत लोगों को स्क्रीन से बांधे रखती है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है कि आखिर मोबाइल की इस बढ़ती लत से कैसे बाहर निकला जाए।
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा स्क्रीन टाइम
एक हालिया सर्वे के मुताबिक, नई पीढ़ी दिनभर में कई बार बिना जरूरत फोन चेक करती है। यह आदत अब सामान्य व्यवहार नहीं रह गई, बल्कि मानसिक तनाव, बेचैनी और ‘कुछ छूट जाने का डर’ जैसी समस्याओं को जन्म दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से ध्यान भटकता है और उत्पादकता पर भी असर पड़ता है।
मोबाइल एडिक्शन के दुष्प्रभाव
मोबाइल की लत केवल समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। लगातार स्क्रीन देखने से नींद प्रभावित होती है, आंखों में जलन और गर्दन दर्द जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।इसके अलावा दिमाग तेज और छोटे-छोटे डोपामीन हिट्स का आदी हो जाता है, जिससे धैर्य और एकाग्रता में कमी आने लगती है।
लत को समझना क्यों है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई चीज हमें खुशी नहीं देती, लेकिन उसके बिना बेचैनी होने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि वह लत बन चुकी है। मोबाइल के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां लोग बिना किसी खास कारण के बार-बार फोन उठाते हैं।
मोबाइल की लत से छुटकारा पाने के 6 आसान उपाय
सबसे पहले अपने स्क्रीन टाइम पर नजर रखें और उसे सीमित करने की कोशिश करें।
दिन में कुछ समय ‘नो फोन ज़ोन’ तय करें, जैसे खाने के समय या सोने से पहले।
नोटिफिकेशन को कम करें ताकि बार-बार ध्यान न भटके।
खाली समय में किताब पढ़ने, वॉक या किसी हॉबी को अपनाएं।
सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल से दूरी बना लें।
परिवार और दोस्तों के साथ आमने-सामने समय बिताने की आदत डालें।
संतुलन ही है असली समाधान
विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक से दूरी बनाना समाधान नहीं है, बल्कि उसका संतुलित उपयोग ही जरूरी है। अगर सही समय पर इस आदत को नियंत्रित कर लिया जाए, तो न केवल मानसिक शांति बनी रहती है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।