गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में अनेक शारीरिक और हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। इस समय शरीर को केवल मां की आवश्यकताओं की पूर्ति ही नहीं करनी होती, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भी अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना पड़ता है। इसलिए इस अवधि में केवल भोजन की मात्रा बढ़ाना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि भोजन की गुणवत्ता और उसमें मौजूद आवश्यक पोषक तत्व अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। यदि संतुलित आहार नहीं लिया जाए तो मां में खून की कमी, कमजोरी, हड्डियों से जुड़ी समस्याएं और गर्भस्थ शिशु के विकास में बाधा जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के प्रत्येक चरण में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार संतुलित भोजन और नियमित स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक है।
ये विटामिन्स और मिनरल्स निभाते हैं सबसे महत्वपूर्ण भूमिका
अमेरिका के NIDDK (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज) के अनुसार गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम, विटामिन डी, आयोडीन और विटामिन बी12 की आवश्यकता सामान्य से अधिक हो जाती है। फोलिक एसिड गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के प्रारंभिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा जन्मजात न्यूरल ट्यूब दोषों के जोखिम को कम करने में सहायक माना जाता है। आयरन शरीर में लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण और ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति के लिए आवश्यक है, जबकि कैल्शियम शिशु की हड्डियों और दांतों के विकास के साथ मां की हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद करता है। विटामिन डी कैल्शियम के बेहतर अवशोषण में सहायक होता है, आयोडीन मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए आवश्यक है तथा विटामिन बी12 रक्त निर्माण और तंत्रिका तंत्र के स्वस्थ कार्य में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
संतुलित आहार से पूरी की जा सकती है अधिकांश पोषण संबंधी जरूरत
गर्भावस्था के दौरान भोजन में विविधता रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, विभिन्न प्रकार की दालें, राजमा, छोले, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर, ताजे मौसमी फल, साबुत अनाज, मेवे और बीज शरीर को अनेक आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स प्रदान करते हैं। जो महिलाएं अंडा या मछली का सेवन करती हैं, उनके लिए ये भी उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और विटामिन बी12 के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। वहीं शाकाहारी महिलाओं के लिए दूध एवं दुग्ध उत्पाद, दालें और सोया उत्पाद पोषण की दृष्टि से उपयोगी विकल्प माने जाते हैं। पोषण विशेषज्ञों का सुझाव है कि ताजे, स्वच्छ और घर में बने संतुलित भोजन को प्राथमिकता दी जाए तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन से बचा जाए।
क्या हर गर्भवती महिला को सप्लीमेंट्स लेने चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार केवल भोजन से सभी आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति हर महिला में संभव नहीं होती। यही कारण है कि चिकित्सक गर्भावस्था की अवधि, स्वास्थ्य स्थिति, रक्त जांच और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम अथवा अन्य सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी प्रकार का विटामिन या मिनरल सप्लीमेंट शुरू करना उचित नहीं माना जाता। कुछ पोषक तत्वों की अत्यधिक मात्रा शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकती है और गर्भावस्था के दौरान अनावश्यक जटिलताओं का कारण बन सकती है। इसलिए किसी भी दवा या सप्लीमेंट का सेवन केवल विशेषज्ञ चिकित्सक के निर्देशानुसार ही करना चाहिए।
स्वस्थ जीवनशैली भी उतनी ही महत्वपूर्ण
संतुलित आहार के साथ पर्याप्त आराम, नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी का सेवन और समय-समय पर प्रसूति विशेषज्ञ से स्वास्थ्य जांच भी स्वस्थ गर्भावस्था के लिए आवश्यक मानी जाती है। धूम्रपान, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाए रखना चाहिए। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की कमजोरी, अत्यधिक थकान, चक्कर, सूजन या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। समय पर उचित देखभाल और पोषण न केवल मां के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ विकास की संभावना भी बढ़ाते हैं।
चिकित्सकीय सलाह के साथ ही करें पोषण संबंधी निर्णय
हर गर्भावस्था अलग होती है और प्रत्येक महिला की पोषण संबंधी आवश्यकताएं भी भिन्न हो सकती हैं। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति के अनुभव या इंटरनेट पर उपलब्ध सामान्य जानकारी के आधार पर आहार या सप्लीमेंट्स में बदलाव करना उचित नहीं है। संतुलित भोजन, नियमित जांच और चिकित्सकीय परामर्श के साथ अपनाई गई स्वस्थ जीवनशैली मां और शिशु दोनों के बेहतर स्वास्थ्य की सबसे मजबूत आधारशिला मानी जाती है।