दुनिया की प्रतिष्ठित Oxford University के वैज्ञानिकों ने खान-पान और कैंसर के बीच संबंध पर अब तक की सबसे बड़ी रिसर्च प्रस्तुत की है। इस अध्ययन में भारत, ब्रिटेन, अमेरिका और ताइवान के 18 लाख से अधिक लोगों के डेटा को 16 वर्षों तक ट्रैक किया गया। इसमें मांसाहारी, मछली खाने वाले, पूर्ण शाकाहारी और वीगन—सभी तरह की डाइट अपनाने वाले लोग शामिल थे।
शोधकर्ताओं ने केवल भोजन की आदतें ही नहीं, बल्कि BMI, लाइफस्टाइल और मेडिकल हिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का भी गहन विश्लेषण किया।
शाकाहारी भोजन से कई कैंसरों का खतरा घटा
रिसर्च के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। मांस खाने वालों की तुलना में शाकाहारी लोगों में ब्रेस्ट, किडनी, फेफड़े, पेट और लीवर कैंसर का जोखिम काफी कम पाया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, पौधों पर आधारित भोजन शरीर की कोशिकाओं को मजबूत करता है और शरीर में हानिकारक प्रोटीन के स्तर को नियंत्रित रखता है, जो कैंसर सेल्स को बढ़ावा दे सकते हैं।
बेहतर मेटाबॉलिज्म और कम हानिकारक प्रोटीन
अध्ययन में सामने आया कि शाकाहारी भोजन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। पिछले शोधों में यह पाया गया था कि शाकाहारियों के खून में एक विशेष प्रोटीन कम मात्रा में पाया जाता है, जिसे किडनी कैंसर के बढ़ने से जोड़ा गया है। शाकाहारी डाइट का पालन करने से शरीर का इंटरनल सिस्टम अधिक कुशलता से काम करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
आंतों के कैंसर को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
स्टडी में यह भी सामने आया कि आंत के कैंसर के मामले में शाकाहारी और मांसाहारी लोगों के बीच बड़ा अंतर नहीं दिखा। जहां आमतौर पर माना जाता है कि रेड मीट का सेवन आंत के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है, वहीं इस अध्ययन में दोनों समूहों का खतरा लगभग समान मिला। वीगन लोगों में इस कैंसर का जोखिम थोड़ा अधिक देखा गया, लेकिन वैज्ञानिक इसे सैंपल साइज कम होने के कारण निर्णायक नहीं मानते।
पोषक तत्वों की कमी न होने दें
मुख्य शोधकर्ता ऑरोरा पेरेज़ कोर्नागो ने कहा कि शाकाहारी आहार फायदेमंद है, लेकिन संतुलित हो तो ही प्रभावी है। यदि भोजन से सभी आवश्यक पोषक तत्व न मिल सकें, तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट लेना जरूरी है। रिसर्च इस बात को एक बार फिर साबित करती है कि हमारी डाइट कैंसर जैसी घातक बीमारी को रोकने में एक महत्वपूर्ण हथियार है।
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