भोपाल. मध्य प्रदेश में बारिश का सीजन अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। इस मानसून सीजन में प्रदेश में अब तक औसतन 33.7 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 90.3 प्रतिशत है। यानी पूरे प्रदेश का बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य स्तर से नीचे बना हुआ है। मानसून की विदाई से पहले होने वाली बारिश राज्य के लिए काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे औसत आंकड़े में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। अगर अंतिम दौर में अच्छी बारिश होती है तो कई क्षेत्रों को राहत मिल सकती है और सीजन का अंतिम आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है।
कई जिलों में बारिश की कमी बनी हुई
प्रदेश में बारिश का वितरण इस बार एक जैसा नहीं रहा। कुछ हिस्सों में लगातार बारिश हुई जबकि कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा। आधे से अधिक जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। इन क्षेत्रों में खेती और स्थानीय जलस्रोतों पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। किसान और स्थानीय प्रशासन दोनों ही मानसून के बचे हुए दिनों पर निगाहें टिकाए हुए हैं। कम बारिश वाले इलाकों में जलसंकट की आशंका बनी हुई है इसलिए अंतिम दौर की बारिश इनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इंदौर संभाग सबसे ज्यादा पिछड़ा
क्षेत्रीय स्थिति देखें तो इंदौर संभाग बारिश के मामले में सबसे ज्यादा पिछड़े क्षेत्रों में शामिल है। यहां सामान्य बारिश की तुलना में स्पष्ट कमी बनी हुई है। इसका असर खेती और स्थानीय जलस्रोतों पर भी देखने को मिल रहा है। संभाग के कई जिलों में अपेक्षित बारिश न होने से फसलों की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में मानसून का आखिरी दौर किसानों और बारिश की कमी वाले इलाकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर इस अवधि में अच्छी बारिश होती है तो इंदौर संभाग समेत अन्य पिछड़े क्षेत्रों को राहत मिलने की संभावना है।
भोपाल समेत 22 जिलों में कोटा पूरा
बारिश की तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। प्रदेश के 22 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा 100 प्रतिशत या उससे ऊपर पहुंच चुका है। इनमें राजधानी भोपाल भी शामिल है। इन क्षेत्रों में सामान्य से अच्छी बारिश होने के कारण कई जलाशयों और बांधों में पर्याप्त पानी पहुंचा है। इन जिलों में जलभंडारण की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है। वहीं जिन जिलों में बारिश कम रही है वहां अब मानसून की बची हुई अवधि पर निगाहें टिकी हैं। बारिश की यह दोहरी तस्वीर प्रदेश के मौसम पैटर्न की असमानता को साफ दर्शाती है।
विदाई से पहले अगले 11 दिन क्यों अहम
मध्य प्रदेश से मानसून की औपचारिक विदाई में करीब 11 दिन का समय बताया जा रहा है। यही अवधि अब मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार विदाई से पहले प्रदेश में बारिश का एक और मजबूत दौर बन सकता है। अगर यह सिस्टम प्रभावी रहा और कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई तो मंडला, पन्ना, मंदसौर और मुरैना जैसे जिलों समेत अन्य कम बारिश वाले क्षेत्रों के आंकड़ों में सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल प्रदेश में बारिश की तस्वीर दो हिस्सों में बंटी हुई नजर आ रही है। कुछ जिलों ने अपना सामान्य कोटा पूरा कर लिया है जबकि कई इलाके अब भी औसत आंकड़े से पीछे हैं। ऐसे में मानसून की विदाई से पहले होने वाली बारिश यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है कि इस सीजन का अंतिम बारिश आंकड़ा सामान्य के कितना करीब पहुंचता है।