भोपाल | मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर पलटवार किया है। ‘लोकतंत्र बचाएं, अराजकता हटाएं’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में हार और जीत लोकतंत्र का हिस्सा हैं। हार मिलने पर राजनीतिक दलों को चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने के बजाय अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए और जनता के बीच जाकर काम करना चाहिए।
राहुल गांधी को CM मोहन यादव की नसीहत
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों स्वाभाविक हैं। किसी भी चुनाव में हार के बाद राजनीतिक दलों को अगले पांच साल जनता के बीच रहकर काम करना चाहिए और लोगों का विश्वास जीतने के लिए मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद अपनी कमियों का आकलन करने के बजाय पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन मजबूत करने की नसीहत दी।
केरलम में जीत तो चुनाव आयोग सही, बंगाल में हार तो सवाल?
सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दल अलग-अलग राज्यों में एक ही चुनाव आयोग की देखरेख में चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अगर किसी राज्य में जीत मिलती है तो चुनाव आयोग की व्यवस्था सही मानी जाती है, लेकिन दूसरे राज्य में हार मिलने पर उसी व्यवस्था पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? मुख्यमंत्री ने केरलम और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों का नजरिया जीत और हार के आधार पर नहीं बदलना चाहिए।
चुनाव आयोग पर संदेह है तो जीत पर भी उठाएं सवाल: CM
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह है, तो उसे अपनी जीत और हार—दोनों के नतीजों को लेकर एक समान रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब उम्मीदवार एक ही चुनावी व्यवस्था के तहत चुनाव लड़ते हैं, तो हारने के बाद नतीजों को गलत बताना कितना उचित है।