लखनऊ | उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवारों को पक्का घर देने के बाद अब उन्हें पेयजल, बिजली, रसोई गैस और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिले, ताकि उनके जीवन स्तर में वास्तविक सुधार हो सके। साथ ही, आवास निर्माण की गुणवत्ता और लाभार्थियों के चयन की निगरानी मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
यूपी में 42 लाख से अधिक आवास आवंटित
मंगलवार को लखनऊ के होटल हयात में ग्रामीण विकास मंत्रालय की क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 42 लाख से अधिक और मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत करीब छह लाख आवास आवंटित किए जा चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को स्वीकृति-पत्र भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ परिवारों को अन्य जरूरी सुविधाओं से जोड़ना भी आवश्यक है।
पानी, बिजली, गैस और रोजगार से जोड़ने पर जोर
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि केवल पक्का मकान मिलने से ग्रामीण परिवारों की सभी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। यदि घर में पेयजल, बिजली और रसोई गैस जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं और रोजगार के साधन भी सीमित हैं, तो जीवन स्तर में अपेक्षित बदलाव नहीं आ पाएगा।
इसीलिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जरूरत बताई गई।
आवास निर्माण की गुणवत्ता पर रहेगी निगरानी
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवास योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। लाभार्थियों के चयन में पात्रता के मानकों का पालन किया जाए और निर्माण पूरा होने तक नियमित निगरानी रखी जाए। उन्होंने आवास निर्माण की गुणवत्ता से समझौता नहीं करने पर भी जोर दिया, ताकि लाभार्थियों को सुरक्षित और टिकाऊ घर मिल सकें।
डिजिटल सोशल ऑडिट से बढ़ेगी पारदर्शिता
कार्यशाला में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान और ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता बताई।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक शक्तिकांत सिंह ने डिजिटल सोशल ऑडिट, नियमित निगरानी और समूह आधारित आवास निर्माण जैसे उपायों के जरिए पारदर्शिता बढ़ाने की जानकारी दी।
प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में अपनाए जा रहे सफल प्रयोगों से सीख लेकर उन्हें प्रदेश में भी लागू करने की संभावनाओं पर काम करना चाहिए।
सात राज्यों के अधिकारियों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में बस्ती, फतेहपुर और लखीमपुर खीरी के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। इसके अलावा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के अधिकारी भी शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आवास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना, लाभार्थियों को अन्य सरकारी सुविधाओं से जोड़ना और निर्माण की गुणवत्ता व पारदर्शिता सुनिश्चित करना रहा।