लखनऊ: चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से उत्तरप्रदेश में मौसम बदलने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 29 से 31 अक्टूबर के बीच पूर्वांचल और अवध के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज आंधी, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। तूफानी हवाओं की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का दावा किया गया है। संभावित खतरे को देखते हुए राहत आयुक्त ने सभी जिलों के अधिकारियों और राहत कंट्रोल रूम को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं, धान और मक्का सहित अन्य फसलों को नुकसान से बचाने के लिए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
पूर्वांचल और अवध में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल और अवध क्षेत्र पर विशेष नजर रखी जा रही है। 29 से 31 अक्टूबर के बीच कई स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान है।इस दौरान तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका है। खराब मौसम का असर खेती, यातायात और सामान्य जनजीवन पर पड़ सकता है। किसानों को अपनी तैयार फसलों को सुरक्षित रखने और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
सभी जिलों के अधिकारी अलर्ट मोड में
संभावित आंधी-बारिश को देखते हुए राहत आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों और राहत कंट्रोल रूम को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।प्रशासन को जिला आपदा नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने को कहा गया है। पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई और राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।प्रशासन का जोर इस बात पर है कि तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण जन-धन का नुकसान कम से कम हो। इसके लिए जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी करने को कहा गया है।
धान और मक्का की फसल बचाने के लिए क्या करें किसान?
संभावित खराब मौसम को देखते हुए किसानों को फसल की कटाई, भंडारण और खेतों में जल निकासी पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
1. पकी फसल की कटाई और सुरक्षित भंडारण
धान या मक्का की फसल 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी है, तो स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार जल्द कटाई की तैयारी करें।
काटी गई फसल को खुले खेत या खलिहान में न छोड़ें।
फसल को सुरक्षित, ऊंचे और ढके हुए स्थान पर रखें तथा मजबूत तिरपाल से ढंकें।
भंडारण के दौरान यह सुनिश्चित करें कि बारिश का पानी फसल तक न पहुंचे।
2. खेतों में पानी जमा न होने दें
सब्जियों, बागवानी और धान के खेतों में जलभराव रोकने के लिए पहले से जल निकासी की व्यवस्था करें। खेतों के किनारों पर नालियां तैयार रखें, ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।खराब मौसम के दौरान खाद और कीटनाशकों के छिड़काव से बचें। सिंचाई भी फसल की स्थिति और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार ही करें।
3. फसल बीमा वाले किसान 72 घंटे में दर्ज कराएं शिकायत
अगर तूफानी बारिश से फसल को नुकसान होता है, तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों को निर्धारित समय सीमा में इसकी सूचना देनी चाहिए।दी गई जानकारी के अनुसार, किसान फसल नुकसान की शिकायत टोल-फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के भीतर दर्ज करा सकते हैं। शिकायत करते समय नुकसान की जानकारी, खेत का विवरण और उपलब्ध फोटो जैसे साक्ष्य सुरक्षित रखना उपयोगी होगा। मुआवजे की पात्रता और प्रक्रिया संबंधित बीमा नियमों के अनुसार तय होगी।
किसानों और आम लोगों को सावधानी बरतने की सलाह
संभावित आंधी-बारिश के दौरान लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। बिजली चमकने के समय पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर ढांचों से दूर रहें। किसानों को कटाई और भंडारण की योजना स्थानीय मौसम अपडेट के अनुसार बनानी चाहिए।प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के बीच मौसम की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी है।