भोपाल, 29 अगस्त 2026 | मध्य प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर सवाल उठाए हैं। पटवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की Performance Grading Index for Districts (PGI-D) 2025-26 रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रदेश का कोई भी जिला कुल अंकों के 60 प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाया। उन्होंने इसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत बताते हुए सरकार से छह बिंदुओं पर जवाब मांगा है। कांग्रेस का कहना है कि ये आंकड़े उसका अपना सर्वे नहीं, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की मूल्यांकन व्यवस्था से लिए गए हैं। हालांकि रिपोर्ट के आंकड़ों की राजनीतिक व्याख्या और उससे निकाले गए निष्कर्ष कांग्रेस के हैं।
क्या है PGI-D, कैसे होता है जिलों का मूल्यांकन?
Performance Grading Index for Districts यानी PGI-D केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की एक मूल्यांकन प्रणाली है। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन का आकलन करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां सुधार की जरूरत है। कांग्रेस के मुताबिक 2025-26 की रिपोर्ट में देश के 784 जिलों का 70 संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया है। इनमें Learning Outcomes, Classroom Transaction, Infrastructure, School Safety & Child Protection, Digital Learning और Governance जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। पूरे मूल्यांकन के लिए अधिकतम 600 अंक निर्धारित हैं।
कांग्रेस का दावा- MP का कोई जिला 60% तक नहीं पहुंचा
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दावा किया कि मध्य प्रदेश का कोई भी जिला 360 अंक यानी कुल 600 अंकों के 60 प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाया। कांग्रेस के अनुसार प्रदेश में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिले को भी अधिकतम 333 अंक मिले, जो कुल अंकों का 55.5 प्रतिशत है। पटवारी ने इसी आधार पर सवाल किया है कि प्रदेश में लंबे समय से भाजपा की सरकार रहने के बावजूद स्कूली शिक्षा के मामले में कोई जिला 60 प्रतिशत के स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पाया। यहां ध्यान देना जरूरी है कि PGI-D की अपनी ग्रेडिंग पद्धति होती है। इसलिए 60 प्रतिशत को सीधे स्कूल परीक्षा की तरह “फर्स्ट क्लास” कहना कांग्रेस की राजनीतिक तुलना है, शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक PGI-D ग्रेड श्रेणी नहीं।
भोपाल के Learning Outcomes और School Safety पर सवाल
पटवारी ने अपने पत्र में राजधानी भोपाल के प्रदर्शन का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार भोपाल में Learning Outcomes से जुड़े संकेतकों का प्रदर्शन करीब 47 प्रतिशत और School Safety & Child Protection का प्रदर्शन लगभग 37 प्रतिशत रहा। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि राजधानी होने और अपेक्षाकृत बेहतर संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद यदि इन क्षेत्रों में प्रदर्शन कमजोर है तो प्रदेश के दूरदराज जिलों की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
इंदौर के आंकड़ों को लेकर भी सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष ने इंदौर के प्रदर्शन का हवाला देते हुए दावा किया कि जिले में Learning Outcomes करीब 47 प्रतिशत और School Facilities से संबंधित प्रदर्शन लगभग 41 प्रतिशत रहा। पटवारी ने सरकार से पूछा है कि राज्य के प्रमुख शहरी और आर्थिक केंद्रों में शामिल इंदौर में भी शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतकों का प्रदर्शन बेहतर स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पाया।
सागर में Digital Learning को लेकर उठाए सवाल
पटवारी ने सागर जिले में Digital Learning का प्रदर्शन करीब 24 प्रतिशत होने का दावा किया है। इसके आधार पर उन्होंने डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता और उपयोग को लेकर सरकार से सवाल किए। कांग्रेस ने मांग की है कि जिन जिलों में Digital Learning का प्रदर्शन 30 प्रतिशत से नीचे है, वहां इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्ट क्लास, डिजिटल उपकरण और शिक्षकों के तकनीकी प्रशिक्षण का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
बड़वानी की स्थिति पर भी जताई चिंता
पटवारी ने बड़वानी जिले को लेकर कई संकेतकों का जिक्र किया है। कांग्रेस के अनुसार यहां School Safety & Child Protection करीब 26 प्रतिशत, Learning Outcomes करीब 36 प्रतिशत और Digital Learning लगभग 16 प्रतिशत रहा। इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस ने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों की स्कूली शिक्षा में संसाधनों तथा सीखने के स्तर को लेकर विशेष कार्ययोजना बनाने की मांग की है।
उज्जैन और धार के Digital Learning पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष के पत्र में उज्जैन और धार का भी उल्लेख है। उनके मुताबिक उज्जैन में School Safety का प्रदर्शन करीब 34 प्रतिशत और Digital Learning लगभग 28 प्रतिशत है। वहीं धार में Digital Learning का प्रदर्शन करीब 20 प्रतिशत बताया गया है। कांग्रेस ने इन आंकड़ों के आधार पर सरकार से पूछा है कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के दावों के बावजूद कई जिलों में संबंधित संकेतकों का प्रदर्शन कमजोर क्यों है।
CM मोहन यादव से इन 6 मुद्दों पर मांगा जवाब
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से PGI-D रिपोर्ट के आधार पर छह प्रमुख कदम उठाने की मांग की है। इनमें प्रदेश के सभी जिलों के प्रदर्शन की श्वेत-पत्र के रूप में सार्वजनिक समीक्षा, Learning Outcomes में कमजोर जिलों के लिए समयबद्ध सुधार योजना और 30 प्रतिशत से कम Digital Learning वाले जिलों में डिजिटल संसाधनों का स्वतंत्र ऑडिट शामिल है। इसके अलावा कांग्रेस ने कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों में School Safety & Child Protection का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने, सभी जिलों के Learning Outcomes की मुख्यमंत्री स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा करने और सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि प्रदेश का कोई जिला 60 प्रतिशत के स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पाया।
‘बच्चों का भविष्य राजनीतिक प्रचार का विषय नहीं’
पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक प्रचार तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षा की वास्तविक स्थिति पर खुली चर्चा करने और कमजोर क्षेत्रों के लिए ठोस सुधार योजना तैयार करने की मांग की है। अब इस मामले में राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। कांग्रेस की ओर से उठाए गए जिला-स्तरीय आंकड़ों और मांगों पर सरकार क्या जवाब देती है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।
PGI-D को लेकर यह अंतर समझना जरूरी
PGI-D किसी स्कूल बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट नहीं है। इसमें जिलों का प्रदर्शन कई अलग-अलग संकेतकों और डोमेन के आधार पर मापा जाता है। इसलिए 333/600 को गणितीय रूप से 55.5 प्रतिशत कहा जा सकता है, लेकिन इससे किसी जिले को सीधे “सेकंड डिवीजन” या 360 से अधिक होने पर “फर्स्ट क्लास” कहना PGI-D की आधिकारिक शब्दावली नहीं है। इसी तरह कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत जिला-स्तरीय प्रतिशत संबंधित डोमेन के प्राप्त अंकों को अधिकतम अंकों से तुलना करके निकाले गए हो सकते हैं। खबर प्रकाशित करते समय मूल PGI-D स्कोर और कांग्रेस की राजनीतिक व्याख्या को अलग-अलग रखना जरूरी है।