भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य शिक्षक पुरस्कार की चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब केवल नवाचार, शोध कार्य या विशेष उपलब्धियां ही किसी शिक्षक को सम्मान दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन, विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम और नियमित उपस्थिति को भी प्रमुख आधार बनाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों से दो-दो शिक्षकों का चयन किया जाएगा। इस तरह हर वर्ष कुल 110 शिक्षकों को राज्यपाल के हाथों राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि पुरस्कार ऐसे शिक्षकों को मिले, जिन्होंने लगातार बेहतर शिक्षण कार्य, अनुशासन और विद्यार्थियों के उत्कृष्ट परिणाम सुनिश्चित किए हों। इसी उद्देश्य से चयन के लिए नए और अधिक स्पष्ट मानदंड तय किए गए हैं।
अब हर जिले से मिलेगा प्रतिनिधित्व
अब तक राज्य स्तर पर सीमित संख्या में शिक्षकों को यह सम्मान मिलता था। पिछले वर्षों में केवल 14 शिक्षकों का चयन किया जाता था, जिसके कारण कई योग्य शिक्षक पुरस्कार से वंचित रह जाते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक जिले से दो उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन होगा। इससे प्रदेश के सभी जिलों को समान अवसर मिलेगा और अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया जा सकेगा।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए भी चयन प्रक्रिया शुरू
राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर भेजे जाने वाले शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस वर्ष मध्यप्रदेश से छह शिक्षकों के नाम राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किए जाएंगे। इसके लिए भी पात्र शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
पहली से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए नए मानदंड
प्राथमिक और माध्यमिक स्तर (कक्षा 1 से 8) के शिक्षकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त विद्यार्थियों का शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम रखा गया है। इसके अलावा संबंधित विषय में कम से कम 80 प्रतिशत विद्यार्थियों का ए-ग्रेड से उत्तीर्ण होना भी आवश्यक होगा। चयन पिछले पांच वर्षों के परीक्षा परिणामों के आधार पर किया जाएगा, ताकि शिक्षकों के लगातार प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा सके।
हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी शिक्षकों के लिए भी तय हुए मानक
कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए भी न्यूनतम 80 प्रतिशत परीक्षा परिणाम अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही शिक्षकों की 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस भी जरूरी होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहें और शिक्षण कार्य की गुणवत्ता बनी रहे।
10 अगस्त तक किए जा सकेंगे आवेदन
राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए पात्र शिक्षक शिक्षक विमर्श पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 25 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और 10 अगस्त 2026 इसकी अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति
सरकार द्वारा तय किए गए नए मानदंडों पर शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राज्य शिक्षक पुरस्कार की शर्तें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की तुलना में अधिक कठोर बना दी गई हैं। संगठनों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों के नवाचार, शोध कार्य, ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने, सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा सुधार जैसे कार्यों को भी महत्व दिया जाता है, जबकि नई राज्य स्तरीय प्रक्रिया में मुख्य जोर परीक्षा परिणाम और उपस्थिति पर दिया गया है।
गुणवत्ता सुधार की दिशा में सरकार का कदम
शिक्षा विभाग का मानना है कि नए नियमों से विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम और शिक्षकों की जवाबदेही में सुधार होगा। वहीं शिक्षक संगठनों का कहना है कि केवल परीक्षा परिणाम के आधार पर किसी शिक्षक की योग्यता तय करना उचित नहीं है और चयन प्रक्रिया में नवाचार, सामाजिक योगदान तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास जैसे पहलुओं को भी बराबर महत्व मिलना चाहिए।
राज्य शिक्षक पुरस्कार की नई व्यवस्था को लेकर शिक्षा जगत में चर्चा तेज है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नए मानदंडों के तहत चयन प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और इसका प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।