मध्यप्रदेश में लंबे समय तक पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित रहने के बाद अब एक बार फिर प्रमोशन का मुद्दा गरमा गया है। राज्य के 1 लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी प्रमोशन की पात्रता से जुड़ी सेवा शर्तों में एकमुश्त छूट देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते नियमों में राहत नहीं दी तो सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में प्रस्तावित विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने अंतिम प्रमोशन से वंचित रह जाएंगे।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को सौंपा जाएगा ज्ञापन
मध्यप्रदेश मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के पदाधिकारी मंगलवार को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। संघ का कहना है कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच लंबे समय तक प्रमोशन नहीं होने के कारण हजारों अधिकारी और कर्मचारी समय पर पदोन्नति नहीं पा सके। बाद में प्रमोशन तो मिले, लेकिन अब उनकी सेवा अवधि इतनी कम बची है कि अगला प्रमोशन मिलना मुश्किल हो गया है।
अगली DPC में हजारों कर्मचारी हो सकते हैं बाहर
संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक के मुताबिक, जिन कर्मचारियों को वर्षों बाद पहली पदोन्नति मिली, उनमें से अधिकांश अगले पांच वर्षों के भीतर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में वर्तमान नियमों के अनुसार वे अगली पदोन्नति के लिए पात्र नहीं बन पाएंगे, जबकि इसमें उनकी कोई व्यक्तिगत गलती नहीं है।
क्या है कर्मचारियों की मुख्य मांग?
संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि विशेष परिस्थितियों को देखते हुए सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में होने वाली DPC के लिए योग्य सेवा अवधि की शर्त में एकमुश्त छूट दी जाए। उनका कहना है कि इससे वर्षों तक रुकी रही प्रमोशन प्रक्रिया से हुए नुकसान की आंशिक भरपाई हो सकेगी।
वर्तमान नियम क्या कहते हैं?
मौजूदा नियमों के अनुसार किसी अधिकारी या कर्मचारी को अगले पद पर पदोन्नति के लिए पात्र होने से पहले संबंधित पद पर कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य होता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में राज्य मंत्रिमंडल के पास इस अवधि में छूट देने का अधिकार भी मौजूद है।
संघ ने सरकार को दिया यह तर्क
कर्मचारी संघ का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में पदोन्नतियां होती हैं तो निचले पद खाली होंगे, जिससे सरकार नई भर्ती कर सकेगी। इससे दोहरा लाभ होगा-
लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए नई सरकारी नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे।
वर्षों तक प्रमोशन रुकने का असर
संघ का कहना है कि लगभग एक दशक तक प्रमोशन प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण कई कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिली। कई मामलों में वरिष्ठ कर्मचारियों को अपने जूनियर कर्मचारियों के साथ ही प्रमोशन मिला, जिससे करियर ग्रोथ और वेतन लाभ दोनों प्रभावित हुए।
अब सरकार के फैसले पर नजर
कर्मचारी संगठनों की मांग के बाद अब सबकी नजर राज्य सरकार पर है। यदि सरकार सेवा शर्तों में एकमुश्त छूट देती है तो बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी अपने लंबित प्रमोशन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।