भोपाल। मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी को लेकर किसानों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था लागू करते हुए उन किसानों को विशेष सुविधा दी है, जिनका आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट) तकनीकी कारणों से बार-बार विफल हो रहा है। अब ऐसे किसान अपनी उपज नामित प्रतिनिधि (नॉमिनी) के माध्यम से भी बेच सकेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी दिक्कतों के कारण कोई भी पात्र किसान समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने से वंचित न रहे। हालांकि, सरकार ने भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए स्पष्ट किया है कि राशि केवल किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ही भेजी जाएगी।
नॉमिनी के जरिए कैसे होगी फसल बिक्री?
नई व्यवस्था के तहत किसान यदि स्वयं बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं करा पा रहे हैं, तो उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि खरीदी केंद्र पर फसल बेच सकेगा। इसके लिए निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था की प्रमुख बातें
किसान का सत्यापन और फोटो अनिवार्य होगा।
नामित प्रतिनिधि (नॉमिनी) का OTP/e-KYC और बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी होगा।
खरीदी की पूरी राशि केवल किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ही भेजी जाएगी।
किसी भी परिस्थिति में भुगतान नॉमिनी के बैंक खाते में नहीं किया जाएगा।
यह सुविधा केवल वास्तविक और विशेष परिस्थितियों में ही लागू होगी।
किसानों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था से उन किसानों को राहत मिलेगी, जिन्हें आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन में तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा था। अब ऐसे मामलों में फसल बिक्री की प्रक्रिया बाधित नहीं होगी और किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ समय पर मिल सकेगा।
सरकार का उद्देश्य
केंद्र सरकार का कहना है कि यह निर्णय किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि तकनीकी बाधाओं के कारण कोई भी पात्र किसान MSP पर अपनी मूंग और उड़द की फसल बेचने से वंचित न रहे। साथ ही भुगतान सीधे किसान के खाते में भेजने की व्यवस्था से पारदर्शिता और सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।