नई दिल्ली। प्रधानमंत्री आवास और अन्य उच्च सुरक्षा वाले सरकारी परिसरों के आसपास प्रस्तावित राजनीतिक मार्च और प्रदर्शनों को लेकर देशभर के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने दिल्ली पुलिस से कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की है। वकीलों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर प्रधानमंत्री आवास जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रदर्शन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की अपील की है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रदर्शन या भीड़ जुटाने की अनुमति तय नियमों के तहत ही दी जानी चाहिए।
हाई-सिक्योरिटी जोन के लिए अलग नियम बनाने की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास, संसद और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे स्थानों पर प्रस्तावित प्रदर्शन या मार्च के लिए पहले से स्पष्ट और एक समान नियम लागू किए जाने चाहिए, ताकि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
वकीलों ने सुझाव दिया कि दिल्ली पुलिस सभी हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों के लिए अलग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करे, जिससे भविष्य में किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
20 जुलाई की घटना का किया उल्लेख
ज्ञापन में 20 जुलाई को हुए एक विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि बिना पूर्व अनुमति या पर्याप्त सुरक्षा प्रबंधों के संवेदनशील क्षेत्रों की ओर मार्च जैसी घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।
इसी संदर्भ में एक राजनीतिक दल द्वारा प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च के आह्वान का भी जिक्र करते हुए भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए पहले से स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
संवैधानिक अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन पर जोर
अधिवक्ताओं ने अपने ज्ञापन में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा की शर्तों के अधीन है।
उन्होंने आग्रह किया कि प्रधानमंत्री आवास और अन्य अति-संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास किसी भी प्रकार की अवैध सभा, जुलूस या प्रदर्शन पर कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कानूनी प्रावधानों का भी दिया हवाला
ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) अधिनियम के संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में इन कानूनों का प्रभावी पालन किया जाना चाहिए।
अधिवक्ताओं का मानना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश होने से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में आसानी होगी और सुरक्षा एजेंसियां संभावित जोखिमों से बेहतर तरीके से निपट सकेंगी।
दिल्ली पुलिस से तत्काल कार्रवाई की अपील
ज्ञापन में दिल्ली पुलिस से अनुरोध किया गया है कि भविष्य में यदि कोई राजनीतिक दल या संगठन हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र की ओर मार्च या प्रदर्शन का सार्वजनिक आह्वान करता है, तो उसके लिए पहले से तय प्रक्रिया लागू की जाए। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और संवेदनशील इलाकों में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सकेगा।
Key Highlights
- सैकड़ों वकीलों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को सौंपा ज्ञापन।
- प्रधानमंत्री आवास के आसपास प्रदर्शन के लिए अलग SOP बनाने की मांग।
- हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों में राजनीतिक मार्च पर स्पष्ट नियम लागू करने की अपील।
- संविधान के अनुच्छेद 19 के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन पर दिया जोर।
- BNS और SPG Act के प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रभावी कार्रवाई की मांग।