D Y Patil Death: पूर्व राज्यपाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद डॉ. डी.वाई. पाटिल का मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए शिक्षा, समाजसेवा और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद किया।
1967 से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
कोल्हापुर से संबंध रखने वाले डॉ. डी.वाई. पाटिल ने वर्ष 1967 में विधायक के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वह लगातार 1967 से 1978 तक विधानसभा सदस्य रहे। सक्रिय राजनीति के बाद उन्होंने शिक्षा और समाजसेवा को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बनाया और देशभर में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए कई संस्थानों की स्थापना की।
शिक्षा के क्षेत्र में बनाई अलग पहचान
डॉ. डी.वाई. पाटिल को देश के अग्रणी शिक्षाविदों में गिना जाता था। उन्होंने डी.वाई. पाटिल विश्वविद्यालय समेत कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर हजारों छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सा, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और अन्य व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में उनके संस्थानों ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
पद्मश्री से हुए सम्मानित
शिक्षा और समाजसेवा में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा था। उनका मानना था कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है और इसी सोच के साथ उन्होंने अनेक शैक्षणिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाया।
कई राज्यों के राज्यपाल रहे
डॉ. डी.वाई. पाटिल ने संवैधानिक पदों पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह त्रिपुरा और बिहार के राज्यपाल रहे। इसके अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक विकास से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि डॉ. डी.वाई. पाटिल एक दूरदर्शी शिक्षाविद, समाजसेवी और पूर्व राज्यपाल थे, जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसेवा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि महाराष्ट्र ने एक दूरदर्शी और समाजहित में काम करने वाले व्यक्तित्व को खो दिया है। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि डॉ. डी.वाई. पाटिल ने शिक्षा, चिकित्सा, खेल, कृषि और समाजसेवा जैसे कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता से लेकर मेयर, जनप्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों के राज्यपाल तक का प्रेरणादायक सफर तय किया।
शिक्षा और समाजसेवा की विरासत छोड़ गए
डॉ. डी.वाई. पाटिल का जीवन राजनीति से कहीं अधिक शिक्षा और समाजसेवा के लिए समर्पित रहा। उनके द्वारा स्थापित संस्थानों से लाखों छात्र शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। उनका योगदान केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में उच्च शिक्षा के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।