लखनऊ - उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस मामले को विपक्ष "चंदा चोरी" बताकर प्रचारित कर रहा है, वह वास्तव में चढ़ावे से जुड़ा एक प्रकरण है, जिसकी जांच ट्रस्ट के अनुरोध पर कराई गई और कानून के मुताबिक कार्रवाई की गई।
ट्रस्ट ने खुद मांगी थी SIT जांच
पत्रकारों से चर्चा में यूपी के मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मीडिया में आई खबरों के बाद राज्य सरकार को पत्र लिखकर विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट न्यायालय द्वारा गठित धर्मार्थ संस्था है और राज्य सरकार ट्रस्ट के आग्रह या न्यायालय के निर्देश के बिना इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती थी।
साक्ष्यों के आधार पर 8 गिरफ्तार
इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने इस बयान में आगे यह भी बताया कि 23 जून को SIT ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद 25 जून को ट्रस्ट की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया और मामला आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए न्यायालय की निगरानी में है।
जांच में किसी साधु-संत की भूमिका नहीं मिली
मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि राम मंदिर परिसर में करीब 1100 से अधिक लोग विभिन्न जिम्मेदारियों में कार्यरत हैं, जिनमें से केवल आठ व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस मामले के बहाने अयोध्या, मंदिर और साधु-संतों की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार रामजन्मभूमि और भगवान श्रीराम से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करती रही हैं।
संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करें
सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए। उनके अनुसार, बिना तथ्यों के आरोप लगाना और धार्मिक संस्थाओं को बदनाम करना उचित नहीं है तथा जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखा जाना चाहिए।