नई दिल्ली। देशभर में मानसून की स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होती दिख रही है। ताजा विश्लेषण के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। हाल के दिनों में कई राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज होने से जलाशयों में जलस्तर बढ़ा है और खरीफ फसलों की बुवाई को भी गति मिली है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त के दौरान अल नीनो का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए मानसून की चाल पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
बारिश की तस्वीर में आया बदलाव
हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों का दायरा पहले की तुलना में घटा है। वहीं, सामान्य से अधिक वर्षा वाले इलाकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सामान्य वर्षा वाले क्षेत्रों का अनुपात कुछ कम हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि यह सुधार पूरे देश में समान रूप से नहीं हुआ, बल्कि कुछ राज्यों में अत्यधिक बारिश के कारण कुल आंकड़ों में सुधार दिखाई दिया है। यानी मानसून का वितरण अभी भी पूरी तरह संतुलित नहीं माना जा सकता।
मध्य और पश्चिम भारत में अच्छी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अल्पकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। इससे जलाशयों में पानी का स्तर और बढ़ सकता है तथा खेती-किसानी को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि प्रशांत महासागर में मजबूत होते अल नीनो और लगभग सामान्य स्थिति में बने हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) के कारण अगस्त के दौरान मौसम में उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है।
खरीफ बुवाई ने पकड़ी रफ्तार
बारिश में सुधार का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी दिखाई दे रहा है। 31 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई का कुल रकबा 894.2 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। हालांकि यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 920.7 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है, लेकिन पिछले सप्ताह की तुलना में अंतर कम हुआ है।
तिलहन की बुवाई में सबसे बड़ा सुधार
इस सीजन में सबसे सकारात्मक बदलाव तिलहन फसलों में देखने को मिला। शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद अब तिलहन की बुवाई पिछले वर्ष के स्तर से आगे निकल गई है।
- तिलहन की बुवाई: 172.3 लाख हेक्टेयर
- पिछले वर्ष: 171.1 लाख हेक्टेयर
यानी पिछले सप्ताह तक जहां बुवाई में कमी थी, वहीं अब यह मामूली बढ़त में बदल चुकी है।
धान अब भी पीछे, मोटे अनाज में सुधार
रिपोर्ट के अनुसार मोटे अनाज की बुवाई में सुधार दर्ज किया गया है और पिछले वर्ष के मुकाबले अंतर काफी कम हुआ है। दूसरी ओर धान की बुवाई में हाल के दिनों में तेजी आने के बावजूद यह अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी पीछे चल रही है। दालों की बुवाई में भी हल्का सुधार देखा गया है, जबकि गन्ने के रकबे में कोई उल्लेखनीय बदलाव दर्ज नहीं किया गया।
कृषि और जल संसाधनों के लिए राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त के दौरान मानसून सक्रिय बना रहता है, तो खरीफ उत्पादन, सिंचाई और जल भंडारण की स्थिति और बेहतर हो सकती है। हालांकि मौसम के असमान वितरण और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए आने वाले सप्ताह कृषि क्षेत्र के लिए अहम रहेंगे।
Key Highlights
- देश में बारिश की कमी घटकर 12% रह गई।
- मध्य और पश्चिम भारत में अगले दिनों में अच्छी बारिश की संभावना।
- अगस्त में अल नीनो का खतरा अभी भी बना हुआ।
- खरीफ बुवाई 894.2 लाख हेक्टेयर तक पहुंची।
- तिलहन की बुवाई पिछले साल के स्तर से आगे निकली।
- धान की बुवाई अभी भी पिछले वर्ष से थोड़ी पीछे।
- जलाशयों में जलस्तर बढ़ने से खेती को राहत मिलने की उम्मीद।