मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की हकीकत एक बार फिर पन्ना जिले में सामने आई, जहां मूसलाधार बारिश के बीच प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती को अस्पताल के बाहर ही तड़पना पड़ा। जिम्मेदारों की लापरवाही ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बारिश में अस्पताल पहुंची एम्बुलेंस, गेट पर लटका मिला ताला
ग्राम सकतरा निवासी वंदना वर्मा को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन 108 एम्बुलेंस की मदद से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्दा लेकर पहुंचे। लेकिन यहां पहुंचते ही परिवार के होश उड़ गए—अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ था। तेज बारिश और दर्द से तड़पती महिला को लेकर परिजन घंटों तक अस्पताल के बाहर भटकते रहे, लेकिन न कोई डॉक्टर मिला और न ही कोई कर्मचारी मौके पर पहुंचा।
27 किमी दूर ले जाना पड़ा, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
पीड़िता के ससुर ने बताया कि वे इलाज की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन यहां तो पूरी व्यवस्था ही ‘लॉक’ मिली। कई बार फोन लगाने के बावजूद किसी जिम्मेदार ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा। हालात इतने बदतर हो गए कि आखिरकार गंभीर अवस्था में प्रसूता को 27 किलोमीटर दूर सलेहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ा, जहां भर्ती कराया गया। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि जब अस्पताल ही बंद मिलें, तो ग्रामीण आखिर जाएं तो जाएं कहां? यह लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और घोर विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।